न त न गडकर सम च र

यह हालत निजी अस्पताल हो या सरकारी अस्पताल सभी जगह एक समान है। निजी चिकित्सकों ने तो अपनी ओपीडी सेवा लॉकडाउन के पहले ही दिन से बंद कर दी है और सरकारी ओपीडी में मरीज को नहीं देखा जा रहा है। इस सबके बीच आम मरीज जो अन्य रोगों से ग्रसित हैं उनकी समस्या बढ़ती जा रही है। यहां तक कि अस्पताल के इमरजेंसी में भी अगर मरीज पहुंचता है तो उसको सीधे कोई देखने को तैयार नहीं है। समस्या से पहले ही उसे रेफर करने की तैयारी कर ली जाती है। सदर अस्पताल में कोरोना संदिग्ध मरीज के लिए अलग वार्ड तो बना है लेकिन इसमें एक भी मरीज भर्ती नहीं है। इसके अलावा कोरोना लक्षण वाले मरीज कोरोना सेटर में चेकअप किया जाता है। रोजाना एक दर्जन मरीज आ रहे हैं जिन्हे सामान्य सर्दी-खांसी की समस्या होती है। इसके अलावा अन्य किसी भी मरीज एक तो अस्पताल में इंट्री मुश्किल है और अगर वह पहुंचता है तो उसको देखने वाला कोई नहीं है। अस्पताल में इमरजेंसी में कोई मरीज पहुंचता भी है तो उसको देखा नहीं जा रहा है। कोरोना के खौफ का आलम यह है कि अस्पताल के सभी स्टाफ बिना सुरक्षा मॉस्क और सूट के किसी भी मरीज को देखने के लिए तैयार नहीं है। अस्पताल प्रबंधन मानो नींद में सोया हुआ है। अस्पताल में कोरोना के नाम आम मरीजों को यों ही मरने के छोड़ दिया गया है। अस्पताल प्रबंधन इस संबंध में कुछ भी कहने को तैयार नहीं है। आखिर नियमित इलाज करा रहे मरीज जिन्हे कई अन्य तरह की समस्या होती है या फिर आपात स्थिति बनती है तो उसको देखने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। पब्लिक परिवहन बंद है और निजी एंबुलेंस भी मिलना मुश्किल है। अस्पताल अगर एंबुलेंस सेवा के लिए फोन भी करो तो वह मिलना मुश्किल है। आम मरीज के लिए क्या वैकल्पिक व्यवस्था की गई है इसको देखने के लिए कोई अधिकारी मौजूद नहीं है। टीबी, दमा, मधुमेह, रक्तचाप और अन्य बीमारी से पीड़ित गरीब मरीज जो नियमित दवा लेते थे उनको भी अस्पताल में पहुंच कर दवा लेना मुश्किल हो गया है। काफी मशक्कत कर अगर कोई मरीज पहुंच भी गया तो उसका देखने के लिए कोई तैयार नहीं होगा। पूरा महकमा एक ही काम में लगा है और आम मरीज के बारे में कोई नहीं सोच रहा है। इसके साथ थैलेसिमिया के मरीज भी परेशान है उन्हे ब्लड बैंक से रक्त की आपूर्ति नहीं हो रही है। डोनर भी उपलब्ध नहीं है। कोरोना की व्यवस्था करने में पूरा अस्पताल की व्यवस्था ही चरमरा गई है। अगर जल्द ही आम मरीज के लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई और चिकित्सकीय सेवा बहाल नहीं की गई तो कोरोना महामारी के बजाय लोगों अन्य बीमारी से मरने लगेंगे। यह एक बहुत बड़ी समस्या अब सिर उठा रही है। निजी क्लीनिक और निजी अस्पताल में डॉक्टर इस समय आगे आए आम रोगी के इलाज के लिए अपना दरवाजा खोल दें तो मरीजों को काफी राहत मिलेगी।

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