नईदिल्ली[अभिनवप्रकाश]।केंद्रीयमानवसंसाधनविकासमंत्रालयद्वारादेशकेकुछउच्चशिक्षणसंस्थानोंकोपूर्णस्वायत्ततादेनेकेफैसलेकीजितनीप्रशंसाकीजाए,कमहै।इसफैसलेकेबादयेसंस्थानअपनेकार्योंमेंविश्वविद्यालयअनुदानआयोगयानीयूजीसीयाकिसीभीअन्यसरकारीसंस्थाकेहस्तक्षेपसेमुक्तरहेंगे।राष्ट्रीयमूल्यांकनएवंप्रत्यायनपरिषद(एनएएसी)द्वारादिएगएअंकोंकेआधारपरश्रेष्ठसंस्थानोंकोअपनेनएपाठ्यक्रमचलाने,शोधकार्यकरने,फीसनिर्धारितकरने,स्ववित्तपोषितविशेषपाठ्यक्रमआरंभकरने,उनकेलिएशिक्षकऔरविशेषज्ञोंकोप्रोत्साहनआधारितपारिश्रमिकपरनियुक्तकरनेइत्यादिकीछूटहोगी।इसकेलिएउन्हेंहरबारयूजीसीसेस्वीकृतिनहींलेनीपड़ेगीऔरनहीयूजीसीऔरसरकारीअधिकारीबार-बारसत्यापनकेनामपरइन्हेंपरेशानकरेंगे।यहशिक्षाकेक्षेत्रमेंइंस्पेक्टरराजसमाप्तकरनेऔरनीतिगतफैसलेलेनेमेंविकेंद्रीकरणकीदिशामेंअभीतककासबसेबड़ाकदमहै।येशिक्षासंस्थानअपनेशिक्षकोंकोयोग्यताकेआधारपरसातवेंवेतनआयोगसेभीअधिकवेतनदेसकेंगेताकिशिक्षाकेक्षेत्रमेंश्रेष्ठप्रतिभाओंकोआकर्षितकियाजासके।येअपनापाठ्यक्रमस्वयंनिर्धारितकरसकेंगे।अपनेअन्यकेंद्रभीस्थापितकरसकेंगेऔरऑनलाइनकोर्सयाशॉर्ट-टर्मविशेषज्ञपाठ्यक्रमोंकेमोर्चेपरभीपहलकरसकतेहैं।

भारतकीउच्चशिक्षाव्यवस्थाबेहदघिसी-पिटी

यहांपरयहभीस्पष्टकरनाआवश्यकहैकियहांस्वायत्तताकाअभिप्रायनिजीकरणसेनहींहैंजैसाकिप्रचारितकरनेकीकोशिशकीजारहीहै।इसफैसलेकेबादभीशिक्षासंस्थानोंमेंसरकारकेआरक्षणजैसेअन्यप्रावधानभीपहलेजैसेहीलागूरहेंगे।इसकदमकामुख्यउद्देश्यशिक्षणसंस्थानोंकोतेजीसेबदलतीदुनियाऔरअर्थव्यवस्थाकेअनुरूपढलनेमेंसक्षमबनानाहै।अभीतकभारतमेंचलरहीउच्चशिक्षाव्यवस्थाबेहदघिसी-पिटीहैऔरगिनतीकेकुछसंस्थानोंकोछोड़देंतोबाकीमात्रडिग्रीदेनेकेअलावासमयकीबर्बादीभरहीहैं।इनमेंपढ़नेकेबादछात्रशायदहीकोईनौकरीपानेकीयोग्यतारखतेहैं।भारतमेंबेरोजगारीकाएकसबसेबड़ाकारणयहभीहैकितमामसंस्थानोंकीपढ़ाई-लिखाईवहांसेशिक्षाप्राप्तछात्रोंकोकिसीनौकरीकेयोग्यबनातीहीनहींहैं।एकसर्वेकेअनुसारवर्ष2010मेंभारतमें40लाखसिविलइंजीनियरोंकीआवश्यकताथी,परंतुकेवल5,09,000हीइसयोग्यथेकिउन्हेंकामदियाजाए।इसकेबावजूदबेमानीशिक्षाव्यवस्थाऔरबेकारकीडिग्रीबांटनेकासिलसिलाचलनेदियागयाजिसकापरिणामआजदिखरहाहै।एकओरबड़ीसंख्यामेंपढ़ेलिखे लोगनौकरीकीतलाशमेंभटकरहेहैंवहींदूसरीओरचंदसरकारीनौकरियोंकेलिएमारामारीहोरहीहै।

एकअनुमानकेतहतवर्ष2020मेंदेशको4,27,000आर्किटेक्टयानीवास्तुकारोंकीदरकारहोगीजिसमेंसेतबसिर्फ17प्रतिशतहीउपलब्धहोंगे।इसकासीधाअभिप्राययहहैकिदेशमेंतमामक्षेत्रोंमेंनौकरीतोहै,परंतुउनक्षेत्रोंमेंआवश्यकरूपसेकुशललोगहीउपलब्धनहींहैंऔरजिनक्षेत्रोंमेंलोगोंनेपढ़ाईकीहैउनकानौकरीऔररोजगारसेलेनादेनाहीकमहै।भारतमेंकौशलविकासकीस्थितिभीशर्मनाकहै।इसमोर्चेपरकेवलदोप्रतिशतकामगारोंकोहीऔपचारिकप्रशिक्षणप्राप्तहुआहैजबकिब्रिटेनमेंयहआंकड़ा68प्रतिशत,जर्मनीमें75प्रतिशतऔरदक्षिणकोरियामें96प्रतिशतहै।इसकेबावजूदजबसरकारकौशलविकासऔरउद्यमिताकोबढ़ावादेनाचाहतीहैंऔरउन्हेंशिक्षाव्यवस्थामेंजोड़नाचाहतीहैतोउसकाउपहासउड़ायाजाताहै,विरोधकियाजाताहैकिसरकारसबकोसिर्फ‘निजीकंपनियोंकामजदूर’बनानाचाहतीहै।

सामाजिकविज्ञानऔरमानविकीकेक्षेत्रमेंभारतफिसड्डी

दशकोंकीसमाजवादीराजनीतिऔरमानसिकतानेदेशकोइसकदरखोखलाकरदियाहैकिदेशआंखेंहोेनेकेबावजूदअंधाबनगयाहै।वहयहदेखपानेमेंअसमर्थहैकिदुनियामेंकोईभीऐसादेशनहींजोसमाजवादीनीतियोंऔरसार्वजनिकक्षेत्रकेदमपरविकसितदेशबनाहो।दुनियामेंजितनेभीसमृद्धऔरसफलदेशहैंवेसभीपूंजीवादीऔरनिजीक्षेत्रकीप्रधानतावालेदेशहैंऔरउनदेशोंकीशिक्षाव्यवस्थाबाजारऔरउद्योगजगतसेसीधेजुड़ीहुईहैयानीरोजगारऔरनौकरीकेलिएजिनकोर्सऔरपाठ्यक्रमकीआवश्यकताहोतीहैउन्हेंशुरूकरनेमेंउन्हेंसमयनहींलगा।इसकेविपरीतअपनेदेशमेंतोयहलगताहैकिकिसीकोइसकीपरवाहनहींकिसामाजिकविज्ञानयामानविकीकेक्षेत्रमेंक्यापढ़ायाजारहाहै?इसीतरहराजनीतिविज्ञानहोयासमाजशास्त्रयाफिरइतिहासउनमेंभीदशकोंपुरानेपाठ्यक्रमचलरहेहैं।इनमेंकौनसेनएशोधहुएहैंयाफिरक्याकोईनयामतनिकलकरसामनेआयाहै?

सचतोयहहैकिइनक्षेत्रोंमेंभीभारतपरहोनेवालेलगभगसभीशोधअमेरिकाऔरयूरोपीयविश्वविद्यालयोंसेहीनिकलकरआतेहैं।यहांबैठेलोगविश्वगुरुहोनेकाढोलभरहीपीटतेहैं।ऐसीदयनीयस्थितिकेबादभीभारतमेंएकबड़ातबकाऐसाहैजोकिसीभीपरिवर्तनकाविरोधकरेगाऔरदसतरहकीकहानियांबनाएगाकिकिसप्रकारस्वायत्ततादेनाएकगलतकदमहैयाफिरमात्रकुछहीसंस्थानोंकोस्वायत्ततादेनाभेदभावहै।देशकाभलाचाहनेवालोंकोदोबातेंसमझनीअत्यंतआवश्यकहैं।पहली,तेजीसेबदलतीतकनीकऔरअर्थव्यवस्थाकेपरिप्रेक्ष्यमेंवहदौरसमाप्तहोरहाहैजबजीवनकेआरंभमेंकुछवर्षोंतकपढ़ाईकरजीवनभरउसीयोग्यताकेदमपरनौकरीकरतेरहसकतेथे।अबलोगोंकोनियमितअंतरालपरनएकोर्सकरने,नएउभरतेक्षेत्रोंमेंयोग्यताहासिलकरनेकीआवश्यकतापड़ेगी।दूसरी,शिक्षाव्यवस्थाकाबाजारसेजुड़नाअवश्यंभावीहैऔरसरकारीबाबूराजसेमुक्तहोनाभीउतनाहीआवश्यकहै।डॉ.भीमरावआंबेडकरनेभीसरकारमेंरहतेहुएऐसीशिक्षाव्यवस्थाकीहीवकालतकीथीजोरोजगारपरकहोनेकेसाथहीउद्योगएवंव्यापारजगतकीजरूरतके अनुरूपहो।इसकेलिएउन्होंनेशिक्षणसंस्थानोंकेकौशलविकास,नएपाठ्यक्रम,मूल्यवर्धितपाठ्यक्रमकोसरलताऔरतत्परतासेलागूकरनेकीक्षमतापरबलदियाथा।

बहरहालदेशनेआंबेडकरकेविपरीतनेहरूवादीऔरसमाजवादीनीतिकोअपनायाऔरपरिणामसबकेसामनेहैं।ऐसेमेंउम्मीदहैकिमोदीसरकारकीयहपहलसहीदिशामेंपहलाकदमसाबितहोगी।सरकारसिर्फखानापूर्तितकहीनहींरुकेगी,बल्किइसकेसभीपहलुओंकोदेखतेहुएसहीसेलागूभीकरेगी।साथहीस्कूलीशिक्षाकेस्तरपरभीबड़ापरिवर्तनकरेगी,क्योंकिवहांकेहालाततोऔरभीज्यादाखराबहैं,क्योंकिकिसीभीदेशकीउच्चशिक्षाकास्तरअंतत:इसपरनिर्भरकरताहैकिवहांप्राथमिकऔरमाध्यमिकशिक्षाकास्तरक्याहै?यदिशिक्षाकीयहआधारशिलासहीहैतोफिरउच्चशिक्षाकीइमारतबुलंदबनतीहै।

[लेखकदिल्लीविश्वविद्यालयमेंप्राध्यापकएवंस्तंभकारहैं]