जागरणसंवाददाता,बांदा:¨जदगीकोबहुरंगीयबनानेकेसपनेदेखनेऔरउसपथपरचलनेवालेबूढ़े-बुजुर्गोंकेअरमानफीकेपड़चुकेहैं।महीनेदरहरबरसयूंहीगुजररहेहैं।त्योहारआतेऔरचलेजातेहैं।कुछउम्रदराजसाथियोंकेसाथदिलकादर्दलिएजबरनमुस्कानकेबीचपर्वमनालेतेहैं।शहरकेनरैनीरोडस्थितवृद्धाश्रममेंरहनेवालेचारदर्जनवृद्धोंकादर्दकाकुछयूंहीहै।इनकीकहानीमेंखुशियांथमगईहैंऔरबैलगाड़ीकेपहिएकीतरह¨जदगीगुजररहीहै।

शनिवारकोपूरेदेशनेदशहराकापर्वमनायाहै।इसदिनअपनोंकीबाततोदूरगैरभीएकदूसरेकेपासपहुंचमिलकरशुभकामनाएंदेतेहैं।इसदिनछोटेअपनेबड़ेबुजुर्गोंसेआशीर्वादलेतेहैं।नरैनीरोडस्थितवृद्धाश्रममेंमौजूदासमय55वृद्धहैं।रविवारकोकुल46वृद्धमौजूदथे।इनमेंकईवृद्धोंकेपासखुदकाआशियानाहैनहीकोईख्वाब।सिर्फकिसीप्रकार¨जदगीचलतीरहे,इतनाहीअरमानरहगयाहै।खुटलामोहल्लेकेचुनूबादकाकहनाहैकिउनकाकोईनहींहै।अपनेहमजोलियोंकेसाथहरदिनत्योहारकीतरहमनातेहैं।यदिकुछअच्छाखानेकामनहुआतोसंचालकसेकहदेतेहैं।¨तदवारीकेरामकृष्णनेबतायाकिसिर्फएकबेटीथी,वहससुरालमेंरहतीहै।अबतोगांवजानेकाभीमननहींकरताहै।हरसुबहहरशाममिलनेवालेअपनेइनवृद्धयारोंकेसाथहरत्योहारऐसेहीमनालेतेहैंऔरफिरसुबहहोजातीहै।

वृद्धोंकीकहानी,उनकीजुबानी

-कईमहीनेपहलेवृद्धाश्रमआयाथा।तीनबेटेहैं।एकशराबीहैतोदूसरापागलहोचुकाहै।एकबेटाअपनीपत्नीकेसाथपरदेशमेंरहताहै।उसेअक्सरमारतेपीटतेथे।इसजूझती¨जदगीकोछोड़करवृद्धाश्रममेंरहनाबेहतरसमझा।-ओमप्रकाश,मौदहा

-दशहराहोयाफिरदीपावली,हमतोहरउत्सवऔरत्योहारयहींपरमनातेहैं।उनकेआठबच्चेहैं।लेकिनपरवरिशकेलिएकोईनहीं।खुदकोवहअकेलामहसूसकरतीहैं।वृद्धदिवसकीतोजानकारीनहींलेकिनदशहरातकमेंकोईनहींआया।-जहरी,जखनी

-सुबहनींदखुलीतोदैनिकक्रियाओंकेबादसिर्फगपशपरहजातीहै।कुछदेरसाथीवृद्धकीबातोंसेनिपटनेकेबादसिर्फपत्थरोंकीतरफदेखकरपुरानीयादेंताजाकरतीहूं।दोबेटेहैं।लेकिनकोईफिक्रकरनेवालानहींहै।-सोद्दा,कालूकुआं

-उम्रबढ़नेकेसाथपरिवारनेसाथदेनाछोड़दिया।बच्चोंकीबाततोगैरपत्नीनेभीकिनाराकरलिया।एकबारउसकेपेटमेंपथरीपड़ीतोडॉक्टरनेचुपचापकिडनीहीनिकालली।कुछसालोंबादजानकारीहुईतोकुछनहींहुआ।आंसुओंकेबीचसिर्फसमयगुजररहाहै।-शक्तिदीन,बांदा।