जागरणसंवाददाता,बागेश्वर:कुमाऊंमेंदीपावलीपर्वमेंतमामरीतिरिवाजहैं।रविवारकोमहिलाओंनेपारंपरिकवेश-भूषामेंच्यूड़ेबनाए।गांवोंमेंच्यूड़ेबनानेवालोंकासुबहसेहीतांतालगारहा।ओखलीकीपूजाहुई।उसकेबादच्यूड़ेकूटनेकासिलसिलाशुरूहोसका।कठायतबाड़ानिवासीगृहणीचंपापांडेनेकहाकिच्यूड़ेभैय्यादूजकेदिनकामआतेहैं।पहलेईष्टदेवकोचढ़ाएजातेहैं।उसकेबादघरकेबुजुर्गबच्चोंऔरपरिवारकोच्यूड़ेलगातेहैं।उनकीलंबीउम्रकीकामनाकरतेहैं।उन्होंनेयहभीबतायाकिच्यूड़ेनएधानसेबनाएजातेहैं।उन्होंनेकहाकिशहरीकरणहोनेसेअधिकतरलोगअबबाजारसेभीच्यूड़ेखरीदलातेहैं।लेकिनगांवोंमेंअभीतकयहपरंपराजिदाहै।कठायतबाड़ानिवासीप्रेमापांडेनेबतायाकिदीपावलीपर्वकेसाथहीभैयादूजकेत्योहारकाभीखासमहत्वहै।रविवारकीसुबहमहिलाओंनेभीगेहुएधानकोचूल्हेमेंभूने।इसकेबादउन्होंनेधानोंकोओखलीमेंडालकरउन्हेंमुसलसेकूटकरच्यूड़ेबनाए।त्योहारकेलिएविवाहितबहनेंअपनेमायकेआतीहैं।कईलोगअपनीबहनोंसेच्यूड़ेलगवानेकेलिएउनकेससुरालजाएंगे।हालांकिदीपावली14नवंबरकोहै,लेकिनतैयारियांशुरूहोगईहैं।

By Finch