राकेशकुमारसिन्हा,लोहरदगा:पंकजऔरसरितादौड़तेहुएशोरमचातेहुएघरकीतरफभागरहेहैं,कहरहेहैं,बाबाआरहेहैं।हाथमेंथैलाऔरबोराभीहै।हमारेलिएकपड़ेऔरमिठाईलारहेहैं।घरकेबाहरधनेशरकीपत्नीदरवाजेपरखड़ीहै।उसेपताहैकिधनेशरकितनीमुसिबतोंसेघरलौटरहाहै।वहबच्चोंकेलिएमिठाईऔरकपड़ेनहींपरदेशमेंअपनीखोलीमेंरखाहुआपुरानाबर्तनऔरकपड़ेलेकरलौटरहाहै।फिरभीक्याकरे,नचाहतेहुएभीमुस्कुराकरबच्चोंसेसरिताकहतीहै,हां-हांअभीबाबाकोथोड़ापानीपिनेतोदो,कुछखातोलेनेदो,उसकेबादअपनेकपड़ेऔरमिठाईलेलेना।

लोहरदगाकीयहकहानीकिसीएकगांवकीनहींहै,यहतोउनतमामगांवोंकीकहानीहै,जिसमेंमजदूरअपनेपरिवारकेसपनोंकोआधेमेंछोड़करघरलौटरहेहैं।धनेशरनेपरदेशमेंकुछपायाहोयानपायाहोपरवहअकुशलसेकुशलमजदूरजरूरबनगयाहै।यहांसेजबवहपरदेशगयाथातोवहसिर्फएकमजदूरथा,वहपरदेशमेंक्रशरमशीनकाआपरेटरबनगया।पहलेमहीनेंकानौहजारकमाताथा,अबउसेआपरेटरबननेसे18हजाररूपएमिलरहेहैं।लॉकडाउनकेकारणमहाराष्ट्रमेंवहजिसकंपनीमेंकामकरताथा,वहबंदपड़गयाहै।इसीवजहसेउसेवापसलौटनापड़ाहै।मजदूरबहुतकुछप्रदेशसेसीखकरआयाहैअबहुनरगांवमेंआजमाएगा।लोहरदगाकेकिस्कोप्रखंडकेबेटहठगांवकीयहकहानीआजदेशकेमजदूरबहुलगांवकीतस्वीरहै।गांवकी80सालकीमुनियांकाकीकहतीहैंकिउसकाबेटाकाफीसमयकेबादउसकेपासघंटोंबैठा,खुलकरअपनेदिलकीबातकही।अबजाकरलगाकिउसकाबेटाबड़ाहोगयाहै।

योजनाशुरूहोनेसेमिलरहीराहत

लोहरदगा:गांवमेंमनरेगाकीयोजनाएंशुरूहोनेसेमजदूरोंकोतत्कालीकराहतमिलरहीहै।बेटहठपंचायतकीपड़तालकेदौरानपताचलाकिपंचायतमेंफिलहाल14योजनाएंचलरहीहै।जिसमेंडोभा-4,कच्चानाली-4औरट्रेंचकीयोजनाएंशामिलहै।इनयोजनाओंकेमाध्यमसेमजदूरोंकोकामदेनेकीकोशिशहोरहीहै।बेटहठपंचायतमेंफिलहाल40मजदूरपरदेशसेलौटेहैं।जबकि14मजदूरक्वारंटाइनकासमयपूराकरचुकेहैं।इनकेलिएफिलहालतोमनरेगाकीयोजनाएंरोजगारकेरूपमेंकामचलादेंगी,परंतुयहस्थाईसमाधाननहींहोसकताहै।

मजदूरअबकुशलहोचुकाहै,बसकामकीहैदरकार

लोहरदगा:बेटहठमध्यविद्यालयकेप्रभारीप्रधानाध्यापकलालअरविदनाथशाहदेवकाकहनाहैकिगांवमेंलॉकडाउनकेदौरानअच्छीऔरबुरीदोनोंतरहकीबातेंहुईहै।जोमजदूरकलतककुदालऔरहलचलानाहीजानतेथे,अबवहकुशलहोचुकेहैं।गांवमेंट्रेंडमजदूरोंकीसंख्याबढ़चुकीहै।सरकारकुटीरऔरलघुउद्योगकोलेकरपहलकरेतोगांवकोखुशहालबनायाजासकताहै।

By Farrell