संवादसहयोगी,मोगा

देवीदासकेवलकृष्णचैरिटेबलट्रस्टमेंसुनीलशास्त्रीनेमांगलिकसत्संगऑनलाइनसुनाया।इसदौरानउन्होंनेकहाकिबड़ोंकाआशीर्वादअवश्यलेनाचाहिए।यहबहुतमूल्यवानहोताहै।बस,आपकोथोड़ासाझुकनापड़ेगा,परंतुलाभबहुतअधिकहोगा।

उन्होंनेकहाकिजिसव्यक्तिकेसंस्कारजैसेहोतेहैं,उन्हींकेअनुसारउसकेविचारऔरइच्छाएंमनमेंउत्पन्नहोतीहैं।इसबारेमेंउसकाबुद्धिकास्तरवहीहै,जैसाउसकोमाता-पितावगुरुजनोंआदिसेप्रशिक्षणमेंमिलाहै।उसकेआधारपरउसव्यक्तिकेविचारऔरनिर्णयउसीप्रकारसेबनतेजातेहैं।सही-गलतयाहानि-लाभकानिर्णयकरनेकीउसकीवैसीहीकसौटियांबनतीजातीहैं।फिरवहअपनीउन्हींकसौटियोंकेआधारपरसही-गलतयाहानि-लाभकानिर्णयकरताहै।उसनिर्णयकेअनुसारहीवहअपनाआचरणव्यवहारकरताहै।

उन्होंनेकहाकिपुरानेसमयमेंजोबुद्धिमानलोगथे,वेइसबातकोजानतेथेकिउनकेकार्योमेंयदिउनकेबड़ेबुजुर्गोकासमर्थनवसहयोगहै,तोइससेउन्हेंबहुतअधिकआनंदमिलेगा।इसलिएवेसदाअपनेकार्योमेंअपनेबुजुर्गोकाआशीर्वादलेकरउनकार्योकोकरतेथे।बच्चेआदिजबभीघरसेबाहरजातेथे,तोमाता-पिताकाआशीर्वादलेकरजातेथे।वहउन्हेंबताकरजातेथेकिहमकिसकामकेलिएजारहेहैं।यदिउनकाकार्यउचितहोताथा,तोमाता-पिताउनकोआशीर्वाददेतेथे।यहउनकीओरसेसमर्थनहोताथा।यदिमाता-पिताउनकेकार्योसेसहमतनहींहोतेथे,तोवहींबतादेतेथेकियहकामठीकनहींहै।इसेनहींकरनाचाहिए।ऐसेमेंवेभविष्यमेंहोनेवालीअनेकहानियोंसेबचजातेथे।इसलिएआशीर्वादकेलाभकोसमझतेहुएहमेंअपनेबड़ोंका,माता-पितावगुरुजनोंआदिकासम्मानकरनाचाहिए।पैरछूकरउनकासदाआशीर्वादलें,ताकिजीवनमेंआगेबढ़सकें।

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By Douglas