संतकबीरनगर:परमात्मासबकीआत्मामेंनिवासकरताहै।उसकासाक्षात्कारउसीकोहोपाताहैजिसकेमनमेंभक्तिकीभावनाहोतीहै।भगवानजीवोंकेकल्याणकेलिएसमर्पितहैं।इसेसमझकरकार्यकरनेकीआवश्यकताहै।

बखिराकस्बेमेंआयोजितश्रीमद्भागवतकथाकेतीसरेदिनकथाव्यासधरणीधरमहाराजनेयहबातेंकही।उन्होंनेकहाकिश्रीमद्भागवतकथाश्रवणसेमनुष्योंकेकर्तव्योंकाबोधहोताहै।भगवानश्रीकृष्णनेमहाभारतकेदौरानयहीकिया।उन्होंनेअर्जुनकोमोह-मायासेअलगरहकरअपनेकर्तव्योंकापालनकरनेकेलिएप्रेरितकिया।उन्होंनेकहाकिजन्मलेनेवालेकीमृत्युनिश्चितहोनेकेबादभीलोगइसेस्वीकारनहींकरतेहैं।निष्कामभावसेप्रभुकास्मरणकरनेवालेलोगोंकाइहलोकऔरपरलोकदोनोंसुधरजाताहै।उन्होंनेयहभीकहाकिसंसारकीहरवस्तुनश्वरहै।यदिभगवानकोपालियातोसमझोसबकुछपालिया।उन्होनेपरिक्षित-सुकदेवसंवाद,सतीचरित्रवभक्तध्रुवकीकथासुनाई।कहाकिभगवानकेभजनकेलिएउम्रकाकोईबंधननहींहै।हरउम्रकेलोगभगवानकीआराधनाकरअपनाजन्मसफलबनासकतेहैं।इसलिएजबभीसमयमिलेईश्वरकीकथासुननीचाहिए।संतोंकेसानिध्यमेंरहनाचाहिए।इससेयहलोकहीनहींपरलोकभीसंवरजाताहै।भागवतकथाकेसाथहीश्रीरामकथाकाभीसभीकोश्रवणकरनाचाहिए।इसमौकेपरध्रुवनारायणचौधरी,राजेशसिंह,ओमप्रकाशतिवारी,टिल्लूराय,फूलचंद्रराय,राकेशतिवारी,शिवचरनचौधरी,मुरलीधरपाठकधीरेंद्रचौधरीसमेतबड़ीसंख्यामेंलोगमौजूदरहे।

By Farrell