शिवहर।तरियानीकेनरवारामेंबीतेचारदिनोंसेभक्तिएवंसत्संगकीत्रिवेणीप्रवाहितहोरहीहै,जहाँउपस्थितजनमानसअपनेजीवनकीधन्यताकाअनुभवकररहेहैं।वहींनरवाराकेलोगोंमेइसबातका,दगुमानभीहैकियहाँकीधरतीकोयहसौभाग्यमिलाहैजहांअहर्निश108कीर्तनकुंजोंसेहजारोंभक्तएकसाथसस्वरसीतारामनामकाउच्चारणकररहेहैं।वहींपा‌र्श्वमेंबनेविशालहवनशालामेंवैदिकमंत्रोच्चारकेसाथयज्ञाहुतियाँदीक्जारहीहैं।उधरविशालप्रवचनपंडालमेंबैठेजिज्ञासुभक्तोंकोसंतसुकदेवदासएवनरामाज्ञादासकीसुमधुरवाणीमेंप्रवचनकेमध्यसंगीतसुननेकासौभाग्यमिलाहै।संतद्वयनेकहाकिसंतकादर्शनकलियुगमेंदुर्लभहै,अगरआपकोसंतकेदर्शनकालआभमिलताहैतोयहआपकेसंचितपुण्यकाफलहै।अबयहभीआपसमझलेकिसिर्फगेरुआवस्त्रधारणकरलेनेजटाजूटबढ़ालेनेसेकोईसंतनहींहोजाता।आजकलआएदिनफर्जीसंतोंकीकलईखुलरहीहै,सबकोपताहै,खैर..।संतकाअर्थहैजोमनसा,वाचा,कर्मणासतकाजीवनजीतेहों,जिन्हेंकिसीप्रकारकीसांसारिकतृष्णानहींव्यापतीहो।जिनकीवाणीमेंओजहोमुखमंडलपरतेजहो,जिसकीएकमात्रइच्छाभगवतसेवाएवंभगवतप्राप्तिहो,संपूर्णजीवोंपरदयाकाभावहो,जिसकी²ष्टिसमहोसहीमायनोमेंऐसेसंतकेदर्शनमात्रसेआपकेत्रिविधतापोंकाशमनहोजाएगा।संतईश्वरकेदूतहोतेहैंजिन्हेंइसीनिमित्तभेजाजाताहैकिसमग्रमानवताकाकल्याणहोसके।

By Duncan