ब्रजबिहारी।झीलों,झरनोंऔरहिमनदोंसेनिकलकरनदियांपहाड़ों,घाटियोंऔरपठारोंकेबीचऊबड़-खाबड़रास्तोंसेहोतेहुएमैदानोंमेंपहुंचतीहैंऔरफिरकल-कलबहतीहुईकिसीदूसरीनदीमेंयाफिरसमुद्रमेंमिलकरविलीनहोजातीहैं।इनकीयहयात्राअविरलऔरअविरामचलतीरहतीहै।कभीनखत्महोनेवालेइससफरमेंवेअलग-अलगखान-पान,भाषाऔरवेशभूषाकाप्रतिनिधित्वकरतीहुईचलतीहैं।उनकेकिनारेमहानसभ्यताओंनेजन्मलियाऔरअपनेचरमपरपहुंचीं।

मानवसभ्यताकेआर्थिक,सामाजिकऔरसांस्कृतिकजीवनकोअपनेअंदरसमेटनेवालीनदियोंनेअपनेविकरालरूपसेविनाशकीगाथाएंभीलिखीहैं,लेकिनआधुनिककालमेंनदियोंकोबांधनेकीकोशिशकेकारणउनपरनिर्भरलोगोंकेजीवनपरसबसेअधिकअसरपड़ाहै।देशकीसबसेबड़ीनदियोंमेंशामिलमहानदीकेकिनारेरहनेवालेऐसेहीलोगोंकेजीवनपरआधारितलेखिकाअनिताअग्निहोत्रीकाउपन्यास'महानदी'पाठककोसोचनेपरमजबूरकरताहै।

छत्तीसगढ़कीराजधानीरायपुरसेसटेधमतरीजिलेकेसिहावानामकपर्वतशृंखलासेनिकलनेवालीमहानदीछत्तीसगढ़औरओडिशामेंलगभगएकहजारकिमीकीदूरीतयकरओडिशाकेजगतसिंहपुरजिलेकेपासबंगालकीखाड़ीमेंगिरतीहै।प्राचीनकालमेंचित्रोत्पलाकेनामसेजानीजानेवालीइसनदीकोमहानंदाऔरनीलोत्पलाभीकहाजाताहै।इसकाएकनाममंदवाहिनीभीथा।आधादर्जनसहायकनदियोंकोसाथलेकरअनथकबहनेवालीइसनदीपरवैसेतोतीनबांधबनाएगए,लेकिनहीराकुंडडैमकेकारणजहांकुछलोगोंकोकाफीफायदाहुआ,वहींहाशिएपरखड़ेलाखोंलोगोंकोविस्थापितहोनापड़ा।स्वतंत्रताप्राप्तिकेबादबड़ीनदियोंपरबहुद्देश्यीयपरियोजनाओंकीशुरुआतकीगईऔरइसकेतहतओडिशाकेसंबलपुरमेंमहानदीपर1957मेंहीराकुंडबांधबनायागया।इसकीवजहसेजिनकाजीवनऔरआजीविकाप्रभावितहुई,उनकेपुनर्वासकीकोईगंभीरकोशिशनहींकीगई।

लेखिकानेअपनेइसउपन्यासमेंमहानदीकेकिनारेरहनेवालेतुलाराम,धुरू,मालतीगोंड,नीलकांत,भानु,पार्वतीएवंअन्यपात्रोंकेजरिएएककथानकगढऩेकाप्रयासकियाहै।येपात्रभलेहीकभीएक-दूसरेसेनमिलपाएहों,लेकिनइनसभीकेजीवनकेसंघर्षोंकीकहानीजिसधागेसेगुंथीहुईहै,उसकानाममहानदीहै।यहउपन्यासहमेंबताताहैकिकैसेजबदेशकेपहलेप्रधानमंत्रीजवाहरलालनेहरूकेसामनेहीराकुंडबांधकीवजहसेविस्थापितलोगोंकीपीड़ाबयानकरतेहुएउनकेपुनर्वासकाप्रश्नखड़ाकियागयातोउन्होंनेकहाथाकिप्रभावितलोगोंकोराष्ट्रकेबृहत्तरहितमेंकष्टतोसहनाहीपड़ेगा।

पूराउपन्यासविडंबनाओंसेभराहुआहै,जहांऐसेपुलिसवालेहैं,जिनकेलिएजनताकीजानकीकोईकीमतनहींहै,वहींऐसेपुलिसकर्मीभीहैं,जोनक्सलियोंकीनिरुद्देश्यहिंसाकाशिकारहोजातेहैं।कभीआपकोउनसेघृणाहोगीऔरकभीउनसेसहानुभूति।विकासयोजनाओंकेकारणविस्थापनकीसमस्यापहलेभीथीऔरआजभीहै,लेकिनइसकाएकतरफाविश्लेषणहमेंकहींनहींलेजाएगा।हरचीजकीतरहइसकेभीदोपहलूहैं।इससेइन्कारनहींकियाजासकताकिविस्थापनसेप्रभावितलोगोंकासमुचितपुनर्वासहोनाचाहिए,लेकिनदेशकीलगातारबढ़तीआबादीकेजीवनकोबेहतरबनानेकेलिएविकासयोजनाओंकीभीजरूरतहै।हमेंदोनोंकेबीचसंतुलनबनाकरचलनाहोगा।लेखिकानेइससंतुलनकेबजायकहानीकेसिर्फएकपहलूकोदिखायाहै।

मूलत:बांग्लाभाषामेंलिखनेवालीअनिताअग्निहोत्रीकीइसपुस्तककाअनुवाददिल्लीयूनिवर्सिटीकेहंसराजकालेजमेंअंग्रेजीसाहित्यपढ़ानेवालीनिवेदितासेननेकियाहै।कहनानहोगाकिअनुवादकनेमूलभाषाकेभावकोबनाएरखनेकीपूरीकोशिशकीऔरइसमेंवहसफलभीहुईहैं।वर्ष1980मेंभारतीयप्रशासनिकसेवामेंशामिलहुईअनिताअग्निहोत्रीकीबांग्लामेंविपुलरचनाएंउपलब्धहैं।उपन्यास,कहानीऔरकविताकेसाथअन्यविधाओंमेंभीहाथआजमाचुकींअनिताकोकईपुरस्कारभीमिलचुकेहैं।भारतीयभाषाओंकेअलावाउनकीकईरचनाओंकाजर्मनऔरस्वीडिशभाषामेंभीअनुवादहोचुकाहै।

पुस्तककानाम:महानदी

लेखिका:अनिताअग्निहोत्री

प्रकाशक:नियोगीबुक्स

By Doyle