संवादसूत्र,सुरीर:बृजचौरासीकोसकीपरिक्रमामेंदेशकेकोने-कोनेसेआस्थाकासैलाबउमड़रहाहै।समूचेपरिक्रमामार्गपरराधे-राधेकीगूंजसुनाईदेरहीहै।कान्हाकीभक्तिमेंसराबोरलाखोंपरिक्रमार्थीतमाममुश्किलोंकोदरकिनारकरचौरासीकोसपरिक्रमाकीमंजिलकोपूराकररहेहैं।

जगह-जगहबजरहेडीजेएवंगीतसंगीतपरपरिक्रमार्थीथिरकतेजारहेहैं।समूचेपरिक्रमामार्गमेंमानवश्रंखलाबनतीदिखाईदेरहीहै।सेवा,श्रद्धाऔरभक्तिकेनितनएनजारेदेखनेकोमिलरहेहैं।कोईसेवाकरकेपुण्यकमारहाहैतोकोईकान्हाकेप्रेममेंमस्तहोकरजारहाहै।प्रशासननेभलेहीबृजचौरासीकोसमेंकोईव्यवस्थानहींकीहै,लेकिनजगह-जगहगांवोंकेलोगदिनभरसेवकबनकरखड़ेहैं।

गर्मीऔरथकान,फिरभीनहींपरेशान:आसमानसेआगबरसरही।धरतीतपरहीहै।उमसभरीगर्मीएवंथकानकेबावजूदपरिक्रमार्थियोंकेचेहरेपरपरेशानीकीकोईशिकनतकनहींहै।हालांकिगर्मीकेचलतेरास्तेमेंतमामश्रद्धालुओंकीतबियतबिगड़रहीहै,लेकिनदवाएवंउपचारकराकरवहमंजिलकोपूराकररहेहैं।