नयीदिल्ली,24नवंबर(भाषा)देशमेंअंगदानकोलेकरसरकारद्वाराचलाएजारहेजागरूकताअभियानसेपिछलेतीनसालमेंदेशमेंअंगदानकेग्राफमेंबढ़ोतरीहुयीहैलेकिनअभीभी28राज्योंऔरनौकेन्द्रशासितप्रदेशोंमेंसे22मेंहीअंगदानशुरुहोपायाहै।अंगदानकेलिहाजसेबाकीराज्योंकेमुकाबलेजहांदिल्लीसबसेआगेरहीहैवहींउत्तरप्रदेशऔरबिहारसबसेपीछेहैं।स्वास्थ्यएवंपरिवारकल्याणमंत्रालयकेआंकड़ोंकेमुताबिकदेशमेंअंगदानकेमामले2016में9046सेबढ़कर2018में10,387होगयेहैं।दिल्ली,इसमामलेमेंअन्यसभीराज्योंसेआगेहै।मंत्रालयनेहालहीमेंअंगदानसेजुड़ेआंकड़ेएवंब्योरेकोसंसदमेंपेशकरतेहुयेबतायाकिदिल्लीमें2018मेंसर्वाधिक2066अंगदानकियेगये।यहसंख्या2016में1947और2017में1989थी।देशमेंमुख्यत:गुर्दा,हृदय,फेंफड़ेऔरकॉर्नियाकेअलावास्टेमसेलप्रत्यारोपणकीमांगसबसेज्यादाहोनेकेकारणइनअंगोंकादानहीकियाजाताहै।उल्लेखनीयहैकिमंत्रालयकेअंतर्गतराष्ट्रीयअंगएवंऊतकप्रत्यारोपणसंगठन(नोटो)राष्ट्रीयस्तरपरअंगदानकोबढ़ावादेने,कानूनीप्रक्रियाकेतहतअंगदानकरानेऔरइसबारेमेंगैरकानूनीगतिविधियोंपरनिगरानीरखताहै।यहसंगठनअंगदानकेसंबंधमेंदेशव्यापीजागरुकताअभियानभीचलाताहै।मंत्रालयद्वारानोटोकेहवालेसेपेशआंकड़ोंकेअनुसारअंगदानकेमामलेमेंदिल्लीकेबादतमिलनाडुऔरमहाराष्ट्रदूसरेऔरतीसरेपायदानपरहैं।तमिलनाडुमें2018में1936लोगोंनेअंगदानकियाथाजबकि2016मेंयहसंख्या1611और2017मेंबढ़कर1855होगयी।वहींमहाराष्ट्रमेंपिछलेतीनसालसेलगभगएकहजारलोगप्रतिवर्षअंगदानकररहेहैं।मंत्रालयनेअपनीरिपोर्टमेंमानाहैकिदेशव्यापीजागरुकताअभियानोंकेबावजूदसभी36राज्योंऔरकेन्द्रशासितराज्योंमेंसे22मेंहीअंगदानशुरुहोपायाहै।इतनाहीनहींदेशमेंमृतशरीरसेअंगदानकेबजायजीवितलोगोंद्वारालगभगतीनगुनाअधिकअंगदानकियाजारहाहै।आंकड़ोंसेस्पष्टहैकि2016मेंमृतशरीरसे2265अंगदानकियेगयेजबकिजीवितलोगोंद्वारा6781अंगदानहुये।यहअंतर2017मेंबढ़कर2110केमुकाबले7489होगयावहीं2018मेंमृतशरीरसे2254अंगदानकीतुलनामें8133लोगोंनेजीवितरहतेहीअंगदानकिया।नोटोनेअंगप्रत्यारोपणकीदेशमेंलगातारबढ़तीजरूरतऔरचिकित्साविज्ञानमेंशोधकेलियेअंगदानकीअहमियतकेमद्देनजरमृतशरीरकेदेहदानकोलेकरउत्तरप्रदेश,बिहारऔरपंजाबजैसेबड़ेराज्योंमेंव्यापकजागरुकताअभियानशुरुकियाहैजोअंगदानकेमामलेमेंअभीभीकाफीपीछेहै।बिहारमेंपिछलेतीनसालोंमेंमहज44अंगदानहुये,जबकिउत्तरप्रदेशमेंमृतकोंकेअंगदानकाआंकड़ातीनसालमेंमहज26तकपहुंचपायाहै।

By Fisher