ज्ञानप्रसाद,नारनौल:

गुरुशिष्यपरंपराप्राचीनकालसेचलीआरहीहै।गुरुकादर्जाभगवानसेऊपरमानागयाहै।जहांभगवानश्रीकृष्णनेसंदीपनगुरुसेशिक्षापाईथीवहींश्रीरामनेगुरुवशिष्ठसेशिक्षाग्रहणकीथी।विभिन्नरूपोंमेंगुरुशिष्यपरंपरावर्तमानमेंभीजारीहै।कहींकहींगुरुकुलकीगुरु-शिष्यकीभावनाभीदेखनेकोमिलतीहै।आजभीबहुतसेलोगगुरुकोआदर्शमानकरहीअपनाभविष्यकानिर्णयकरतेहैं।

कनीनानिवासीरणधीरसिंहपिछलेतीससालसेकनीनासेकरीबनौकिलोमीटरदूररेवाड़ीकेजैनाबादस्थितगुरुआश्रममेंअपनेगुरुलालदासमहाराजकेसच्चेशिष्यकेरूपमेंपहचानबनायीहै।50वर्षीयरणधीरसिंहकहतेहैंकिवेअकेलेहीनहींपरिवारकेसभीसदस्योंकागुरुकेप्रतिगहरीआस्थाहै।उनकेआशीर्वादसेहीहरकार्यसिद्धहोताहै।70वर्षीयगुरुलालदासमहाराजभीप्रवचनमेंऐसेशिष्योंकाउदाहरणदेतेहुएयुवापीढ़ीकोमातापिताऔरगुरुजनोंकासम्मानकरनेकाआह्वानकरतेरहतेहैं।रणधीरसिंहकहतेहैंकिसुबहशामजबभीपरेशानीमेंहोतेहैंगुरुलालदासमहाराजकोयादकरतेहैं।गुरुआश्रममेंजाकरवेप्रतिदिनमहाराजसेआशीर्वादप्राप्तकरतेहैं।गुरुकेप्रतिउनकीभक्ति,भक्तोंकेलिएभोजनप्रबंधकरना,किसीखासपर्वपरबनायाजानेवालाविशेषभोजनबनानेवभक्तोंकोखिलानेमेंआनंदमहसूसकरतेहैं।पेशेसेदुकानदाररणधीरसिंहकाकहनाहैकिपरिवारकेसभीसदस्योंकागुरुकेप्रतिगहरीआस्थाहै।उनकामाननाहैकिदुनियामेंकोईभीगुरुसेश्रेष्ठनहींहोसकता।रणधीरसिंहकहतेहैंकिगुरुहीशिष्यकोसच्चामार्गदिखातेहैं।एकवक्तऐसाभीथाजबविशेषपर्वमेंगुरुकोअपनेहाथोंसेखानाखिलाकरहीपरिवारकेसदस्यखातेथेलेकिनबीचमेंएकदुर्घटनामेंअस्वस्थरहनेऔरघरपररहनेकेकारणकुछदिनोंसेगुरुसेदूररहकरबहुततकलीफसही।इसकेबादजबभीवेस्वस्थहुएतुरंतगुरुकेचरणोंमेंजाकरबैठजातेहैं।अस्वस्थअवस्थामेंभीगुरुनेउनकेस्वास्थ्यकीहरपलजानकारीलेतेरहेतथामार्गदर्शनकरतेरहे।रणधीरसिंहकाकहनाहैकिकुछदेरआश्रममेंगुरुकेचरणोंमेंबैठनेसेउन्हेंमानसिकशांतिमिलतीहै।

By Dyer