संवादसहयोगी,मंडीगो¨बदगढ़:दूसरोंकीगलतियांकमदेखनेलगेंगे,क्योंकिउसमेंआपकोअपनीभूलेंनजरआनेलगेंगी।हालांकि,दूसरोंमेंअपनीजैसीसमानताढूंढनाआसाननहींहै।इसकेलिएअभ्यासकरतेरहें।हमारीखुशीहमारेहाथमेंहीहै।देखिएप्रकृतिकेपांचतत्वसभीमेंएकजैसेहोतेहैं।प्रकृतिइसमेंभेदभावनहींकरती।हमलोगजरूरपंचतत्वकेउपयोगकेस्तरपरअसमानताकररहेहैं।इसलिएरोजथोड़ीदेरयहजाननेकेलिएप्रयासकरेंकिहमारेभीतरपृथ्वी,जल,अग्नि,वायुऔरआकाशभरेहुएहैं।उक्तप्रवचनस्वामीविकासचंदविमलनेन्यूशास्त्रीस्थितगायत्रीआश्रममेंसत्संगदौरानकहे।उन्होंनेकहाकिइनपांचोंकोएकजगहएकत्रितकरनाहै।यानिइनतत्वोंकेभीतरजोशक्तिहै,उसकोएकजगहभीतरकेशरीरमेंलाना,दोस्थानसबसेसहीहैं,नाभियाहृदय।यहांपांचतत्वोंकोकेंद्रितकरें।नतीजायहहोगाकिएकलहरदूसरोंकेभीतरकेपांचतत्वोंकोसेजुड़नेकीकोशिशकरेगी।यहींसेआपकोसबमेंसमानताकेदर्शनहोनेलगेंगेऔरभीतरसेजबसमानहैतोहमकिसीसेभीनाखुशक्योंरहें?

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By Duncan