विजयद्विवेदी,बहराइच

मुझेजागतेरहनाहै,क्योंकिअपनेसपनोंकोपानाहै,अपनीकाबिलियतकाकरिश्माइसजगकोदिखानाहै।कामयाबीतोहासिलकरहीलूंगाएकदिन,मुझेतोअपनीअंगुलियोंसेशहरकोजगमगानाहै।इससोचकोपरिलक्षितकररहेहैंबाबासुंदरसिंहमूकबधिरविद्यालयकेबच्चे।इनबच्चोंकास्वरोजगारसृजनकातरीकाअनूठाऔरअप्रतिमहै।इनकेहुनरकाहरकोईकायलहै।अपनीलगनऔरमेहनतसेडिजाइनरमोमबत्तीबनाकरवेदूसरोंकेघरोंकोरोशनकररहेहैं।साथहीआत्मनिर्भरताकाउजालाभीफैलारहेहैं।

शहरकेकानूनगोपुरामुहल्लेमेंबाबासुंदरसिंहमूकबधिरविद्यालयस्थितहै।संचालिकाडॉ.बलमीतकौरबतातीहैंकिविद्यालयमें90मूकबधिरवनेत्रहीनबच्चेशिक्षाग्रहणकररहेहैं।इनमेंप्रांशूगुप्ता,विकासकुमार,समीरखान,ऋषभजायसवाल,स्वातीवअमिताषपिछलेपांचवर्षोसेमोमबत्तीबनाकरस्वावलंबनकीकहानीलिखरहेहैं।डॉ.बलमीतकहतीहैंकिबच्चेपढ़ाईपूरीकरकेजाएंतोरोजगारकेलिएभटकनानपड़े,इसलिएउन्हेंहुनरमंदबनायाहै।यहांबनीमोमबत्तीकीआपूर्तिमांटेसरीस्कूल,जेपीकिड्स,केयरनर्सरीपब्लिकस्कूल,किसानवमहिलापीजीकॉलेजकेअलावापयागपुरकेसेंटजोसेफस्कूलमेंकीजातीहै।दीपावलीपर्वपरशहरवासीभीयहांसेमोमबत्तीखरीदतेहैं।

लागतनहीं,हौसलारखताहैमायने

डॉ.बलमीतबतातीहैंकिदीपावलीपरयेबच्चेकरीबपांचक्विटलमोमबत्तीबनातेहैं।इनकीलागतलगभग70हजाररुपयेहोतीहै।अगरपूरीबिकजातीहैंतोआठ-10हजारकाफायदाहोजाताहै।वहकहतीहैंकिमुनाफाबेशककमहोताहै,लेकिनबच्चोंकेहौसलेकेआगेलाभकोईमायनेनहींरखताहै।वहइसमुनाफेसेबच्चोंकेजरूरीसामानोंकीपूर्तिकरतीहैं।

By Dyer