पेबैकटूसोसायटी।येकेवल4अक्षरहैं।लेकिनइनकाअर्थबड़ाहै,यानी-जोकुछआपकोसमाजसेमिलाहै,उसेजिम्मेदारीसेवापसकरना।नेशनलइंस्टीट्यूटऑफटेक्नोलॉजीमेंइंजीनियरिंगकरनेवालेस्टूडेंट्सकोसंसाधनोंसेशिक्षामिली।अबवहउसेलौटानेकेमकसदसेरोजानाएनआईटीकेआसपासकेबच्चोंकोपढ़ारहेहैं।इसस्कूलकानामहै-प्रयास।मकसदउनबच्चोंतकशिक्षाकीरौशनीलानाजोआर्थिककारणोंसेदूररहे।यहकोशिश15सालसेजारीहै।

कईस्टूडेंट्सनेएनआईटीमेंदाखिलातकलेलियाहै।कुछनेहायरएजुकेशनलेकरअपनाकैरियरबनाया।15विद्यार्थीऐसेहैंजिन्हेंनवोदयाविद्यालयमेंएडमिशनमिली।प्रयासस्कूलकाकांसेप्टयहांकेप्रोफेसरबलबीरकैंथलेकरआएऔरइसकीनींवबांधीएनआईटीकेकैंपसकीपॉजिटिववेवने।प्रो.बलबीरबतातेहैं-2007मेंजॉइनकियातोकुछस्टूडेंट्सबच्चोंकोपढ़ानाचाहतेथे।मुझसेउन्होंनेबातकीतोउन्हेंअपनेविभागकेसामनेपढ़ानेकीइजाजतदी।सबसेपहले15बच्चोंकेसाथपहलशुरूकी।बायोटेकविभागकेसामने5:30से7बजेतकपढ़ानाशुरूकिया।पहलेतोबच्चोंकेमां-बापभेजनेकोतैयारहीनहींथेउनकोसमझानाथोड़ामुश्किलथा।लेकिनसमझानेपरवोराजीहोगए।

लोगोंकेघरोंसेएकत्रितरद्दीबेचकरनिकालतेहैंखर्च

सरकारीस्कूलकेबच्चेभीपढ़नेकेलिएआनेलगे।आज50सेज्यादाबच्चेहैं।एनआईटीकेजोभीवॉलंटियरथेवोभीजुड़गए।लेकिनकोविडकेबादबच्चोंकीसंख्याकमहै।प्रयाससंस्थाकीसारीजिम्मेदारीएनआईटीकेस्टूडेंट्सपरहै।वॉलंटियरलोगोंकेघरोंसेअखबारोंकीरद्दीइकट्‌ठाकरतेहैंऔरउसेबेचकरजोपैसेमिलतेहैंउनसेहीपढ़ाईकाखर्चनिकालतेहैं।कभीस्टूडेंट्सभीअपनेजेबसेमददकरतेहैं।बच्चोंकोपढ़ानेवालेखुदबीटेक,एमटेकऔरपीएचडीकेस्टूडेंटहैंजोक्लासलगानेकेबादज्ञानबांटतेहैं।अबतोनौवीं,दसवीं,ग्यारहवींऔरबारहवींक्लासकेबच्चेभीएक्स्ट्राकोंचिंगकेलिएप्रयासमेंपढ़नेआरहेहैं।कोरोनाकालकेदौरानजबसबलोगघरचलेगएथेतबभीस्टूडेंट्सनेबच्चोंकोऑनलाइनपढ़ाया।

कल्चरलप्रोग्रामकेसाथकईएक्टिविटीभी

प्रोफेसरबलबीरकैंथकेअनुसारहमारामकसदबच्चोंकोशिक्षितकरनेकेसाथउनकीओवरऑलडेवलपमेंटकरनाहै।इसकेलिएप्रयासमेंकल्चरलप्रोग्रामकरवाएजातेहैं।अलग-अलगएक्टिविटीजहोतीहैं।वहकहतेहैंकियदिइनबच्चोंकासहीविकासकियाजाए,सहीदिशादीजाएतोयहभीअच्छेनागरिकबनकरदेशकेविकासमेंयोगदानदेसकतेहैं।प्रयासमेंकोचिंगलेकरकुछस्टूडेंट्सबीटेकमेंएडमिशनलेकरइंजीनियरबनचुकेहैंऔरभविष्यसंवारचुकेहैं।बच्चोंकाआत्मविश्वासजगानेकेलिएस्टेजपरपरफार्मकरनेकामौकादियाजाताहै।

By Duffy