कानपुर,जेएनएन।सावनमाहमेंआजभीबुंदेलखंडकेगांवोंमेंझूलाकाफीलोकप्रियहै।भलेहीउनकीसंख्याकमहोगईहैलेकिनबुजुर्गलोगकहतेहैंकितीससेचालीससालपहलेकामाहौलकुछऔरहीहोताथा।शामढलतेहीघरोंकीनईनवेलीदुल्हनसावनगीतगानेनिकलपड़तीथीं।झूलाझूलनचलोगजनार52झूलाडरे...आदिगीतकेस्वरगूंजतेरहते,मोहल्ला-मोहल्लानीमकेपेड़परझूलापड़ेरहतेऔरवहांदेरशामतकभीड़रहतीथी।पुरानीपरंपराकेअनुसारझूलाशगुनमानाजाताहै।

पनवाडीब्लाककेभरवारागांवनिवासीवृद्वाबेटीबाईबतातीहैं,सावनआनेकाउन्हेंआजभीबेसब्रीसेइंतजाररहताहै।एकसमयथाजबसावनमाहकेआरंभहोतेहीघरकेआंगनमेंलगेपेड़परझूलेपड़जातेथे।महिलाएंगीतोंकेसाथउसकाआनंदउठातीथीं।समयकेसाथपेड़गायबहोतेगएऔरबहुमंजिलाइमारतोंकेबननेसेआंगनकाअस्तित्वलगभगसमाप्तहोगया।ऐसेमेंसावनकेझूलेभीइतिहासबनकरहमारीपरम्परासेगायबहोरहेहैं।अबसावनमाहमेंझूलेकुछजगहोंपरहीदिखाईदेतेहैं।जन्माष्टमीपरमंदिरोंमेंसावनकीएकादशीकेदिनभगवानकोझूलाझुलानेकीपरंपराजरूरअभीभीनिभाईजारहीहै।वर्षाऋतुकीखूबियांअबकिताबोंतकहीसीमितरहगईहैं।आजसेदोदशकपहलेतकझूलोंऔरमेंहदीकेबिनासावनकीपरिकल्पनाभीनहींहोतीथी।80वर्षीयदेवकलीकहतीहैं,सावनमेंप्रकृतिश्रृंगारकरतीहैजोमनकोमोहनेवालाहोताहै।यहमौसमऐसाहोताहैजबप्रकृतिखुशहोतीहैतोलोगोंकामनभीझूमनेलगताहै।भगवानश्रीकृष्णराधासंगझूलाझूलतेऔरगोपियोंसंगरासरचातेथे।इनझूलोंकेनहींहोनेसेलोकसंगीतभीसुननेकोनहींमिलताहै।

बहन-बेटियांमायकेबुलालीजातींथीं:गांवकीबुजुर्गसीतादेवीबतातीहैंकिसावनकेनजदीकआतेहीबहन-बेटियांससुरालसेमायकेबुलालीजातीथीं।पेड़ोंपरझूलाडालकरझूलतीथीं।झुंडकेरूपमेंएकत्रहोकरमहिलाएंदर्जनोंसावनीगीतगायाकरतीथीं।त्योहारमेंबेटियोंकोससुरालसेबुलानेकीपरंपराआजभीचलीआरहीहै,लेकिनजगहकेअभावमेंनतोकोईझूलाझूलपाताहैऔरनहीअबमोर,पपीहावकोयलकीसुरीलीआवाजहीसुननेकोमिलतीहैं।

बदलावकीबयार:पहलेसंयुक्तपरिवारमेंबड़े-बूढ़ोंकेसानिध्यमेंलोगएकदूसरेकेघरोंमेंजुड़तेथे।जबकिएकलपरिवारनेइसआपसीस्नेहकोखत्मकरदियाहै।बुजुर्गमेवालालकहतेहैंकिअबमहिलाएंकम्यूनिटीसेंटरमेंतीजपर्वमनातीहैं।सांस्कृतिककार्यक्रमोंकेमाध्यमसेसभीएकदूसरेकेसाथखुशियांबांटतीहैं।सावनकेझूलेकहांहैं।लानमेंलोहेवबांसकेझूलेलगालिएऔरहोगयापरम्पराकानिर्वाह।अबतोपहनावाभीआधुनिकीकरणकीभेंटचढ़गयाहै।