मधेपुरा।कलंककाजलसेकालाहोताहैं।लोगोंकोकलंकसेबचनेकीजरूरतहै।उक्तबातेंवृंदावनसेआएसरलसंतनारायणदासमहाराजनेउत्क्रमितमध्यविधालयरहटामोहनपुरपरिसरमेंआयोजित11दिवसीयश्रीमदभागवतकथाकेदौरानकही।

उन्होंनेअपनेसंगीतमयप्रवचनकेचौथेदिनभगवानविष्णुकेवामनअवतारकीकथाकावर्णनकरतेहुएकहाकिभगवानविष्णुनेराजाबलिकेमहलपरआकरराजाबलिसेमिलनेकीइच्छाजाहिरकीऔरदानकीमांगकिया।इसदौरानगुरुशुक्राचार्यआएऔरवहवामनदेवकेरूपमेभगवानविष्णुकोपहचानगए।उन्होंनेराजाबलिकोसावधानकिया।इसकेबावजूदराजाबलिनेकहाकिकिमैंउसविलोचनकावंशजहूं,जिसनेअपनीआयुदूसरेकोदानमेंदेदिया।मेरेदरवाजेसेकोईखालीहाथनहींलौटेगा।राजाबलिनेवामनदेवकोतीनपगभूमिदानमेंदेनेकासंकल्पलिया।ढाईपगमेपुरेब्रह्मांडकोनापकरवामनदेवनेकहाकियहतीसरापगकहारखूं।इसपरराजाबलिनेअपनाशरीरअर्पितकरदिया।भगवाननेइससेभाव-विभोरहोकरवरमांगनेकोकहा।बलिनेभगवानकोअपनेपासरहनेकावरमांगलिया।

उन्होंनेकहाकिभक्तकेवशमेंभगवानहोतेहैं,भगवानभावकेभूखेहोतेहैं।जीवकाजन्मकर्मकेअनुसारहोताहै।कथाश्रवणकरनेकेलिएकाफीसंख्यामेंश्रद्धालुउपस्थितथे।इसभागवतकथामेंसर्वधर्मसमन्वयसनातनभागवतपरिवारकेसहयोगीसंतअमरजीतशास्त्री,प्रकाशबाबा,शंकरदास,कमलदास,ललनदासआदिशामिलहैं।शांतिव्यवस्थारखनेकेलिएमोहनपुरपंचायतकेगण्यमानलोगजुटेहैं।कार्यक्रमकासमापन10जनवरीकोहोनानिर्धारितहै।

By Elliott