वाराणसी,जागरणसंवाददाता।लकड़ीकेखिलौनेमात्रबच्चोंकोमनाने-रिझानेतकसीमितनहींरहेबल्किबड़ीसंख्यामेंलोगोंकीआयकाजरियाभीबनगएहैं।यहीकारणहैकिनगरमेंहजारोंमहिलाएंयहांतककियुवतियोंनेभीकाष्ठकलामेंअपनाभाग्यआजमानाशुरूकरदियाहै।इसमेंउन्हेंभरपूरलाभहोनेलगाहै।इसकेलिएएमएमएमईविभागकीओरसेप्रशिक्षणकेलिए300रुपयेप्रतिदिनदिएभीजारहेहैं।

इसकेअतिरिक्तप्रशिक्षणकेदौरानहीउत्पादनकार्यकरनेपरमजदूरीभीदीजारहीहै।ऐसेमेंकुलमिलाकरयेशिल्पीहरमहीने15से20हजाररुपयेकीकमाईकररहेहैं।सबसेबड़ीबातयहहैकियेकमाईघरकेकामकेसाथकीजारहीहै।लोलार्ककुंडनिवासीशुभीअग्रवालबतातीहैंकिवाराणसीमें1500ऐसेपरिवारहैंजिनकाकाष्ठकलासेसीधासंबंधहै।इससेजुड़करयेपरिवारअपनीआर्थिकतरक्कीकामार्गप्रशस्तकियाहै।बहुतसारीमहिलाएंऐसीहैंजिन्होंनेघरकेकामकेसाथलकड़ीकेशानदारखिलौनेबनाकरसमाजकीउनमहिलाओंकेलिएउदाहरणपेशकियाहैजोएकएकरुपयेकेलिएमारेमारेफिररहीहैं।

जीआईटैगऔर30करोड़काबाजार: लकड़ीकेखिलौनेकाकुलकारोबारअब30करोड़केपारपहुंचगयाहै।प्राचीनकालसेलकड़ीकेखिलौनेलोगोंकेलिएमनोरंजनकासाधनरहेहैं।उसदौरानबमुश्किलपांचयादसकीसंख्यामेंखिलौनेबनपातेथेलेकिनशुभीअग्रवालबतातीहैंकिउनकेयहांकीलगभगदोहजारप्रकारकेखूबसूरतखिलौनेबनायेजातेहैं।वहींजीआईटैगलगजानेसेखिलौनेकीमहत्ताबढ़गयीहै।वाराणसीकेइसखासउत्पादकोदुनियाजाननेलगीहै।

काष्ठकलामेंभीमांअन्नपूर्णादेवीकाश्रृंगार:अभीतकलक्ष्मी-गणेशसमेतचिड़ियों,जानवरों,राजा-रानीसमेतकईप्रकारकेमूतियाँऔरखिलौनेशिल्पियोंद्वाराबनायेजातेरहेहैंइसबारमांअन्नपूर्णादेवीकीमूर्तिबनाकरभक्तोंकेसामनेउपलब्धकियागयाहै।ऐसीमूर्तियोंकोग्राहकोंनेखूबपसंदकियाहै।शिल्पियोंनेअपनीकलाकाप्रदर्शनइसप्रकारसेकियाहैकिदेखनेवालामंत्रमुग्धहोजाय।शानदारनक्काशीसेमांअन्नपूर्णाकादिव्यरूपदिखाईदेनेलगाहै।

इंटरनेटमीडियासेविदेशोंतकमेंब्रांडिंग: कोरोनाकालमेंभलेहीसभीमाध्यमोंकेयातयातप्रभावितरहेहोंफिरभीलोगोंघरपररहकरइंटरनेटमाध्यमोंसेअपनीकलाकाप्रचारप्रसारकियाहै।यहीकारणहैकिसिंगापुरजैसेदेशसेलकड़ीकेखिलौनोंकीमांगहुई।इसकेसाथदूसरेदेशोंअमेरिका,जापानसमेतकुछयूरोपीयदेशोंमेंभीलकड़ीकेखिलौनेभेजेजारहेहैं।

By Evans