गढ़वा:गांवोंमेंआयोजितचौपालकीबैठकेंबीतेसमयकीबातबनकररहगईहै।पहलेचौपालमेंग्रामीणबैठककरगांवकेविकासपरचर्चाकरइसपरआवश्यककार्यकियाकरतेथे।साथहीयहांछोटे-मोटेविवादोंकोग्रामीणोंद्वाराचुटकीबजातेहीसमाधानकरलियाजाताथा।लेकिनजैसे-जैसेसमयबीततागयाचौपालपरआयोजितबैठकेंबीतेदिनोंकीबातबनकररहगई।सहीमायनेमेंकहाजाएतोवर्तमानकेभागमभागभरी¨जदगीमेंलोगचौपालकेमहत्वकोभुलतेजारहेहैं।लिहाजागांवोंमेंबनेचौपालआजविरानदिखनेलगेहैं।जानकारलोगोंकाकहनाहैकिपहलेप्रतिदिनग्रामीणचौपालपरएकसाथबैठतेथे।यहांगांव-घरकीसमस्याओंपरलोगखुलकरचर्चाकियाकरतेथे।साथहीग्रामीणोंकीआमसहमतिसेइनसमस्याओंकेसमाधानहेतुप्रयासकियाजाताथा।साथहीग्रामीणोंद्वारागांव-घरकेछोटे-मोटेविवादकोभीचौपालमेंआपसीसहमतिकेमाध्यमसेचुटकीबजातेहीसुलझालियाजाताथा।लेकिनधीरे-धीरेचौपाललगनेकीव्यवस्थादमतोड़तेजारहीहै।अबबुजूर्गभीचौपालकेप्रतिपहलेकीतरहरुचिनहींदिखारहेहैं।-जबसेमोबाइलफोनआयातबसेलोगएकदूसरेसेकटतेजारहेहैं।लोगचौपालकीमहत्ताकोअबनहींसमझरहेहैं।इसकानतीजाहैकिगांवोंकेचौपालविरानहोतेजारहेहैं।गांव-घरकीसमस्याओंकेनिराकरणकेप्रतिकिसीकाध्याननहींहै।यहहमसबोंकेलिए¨चताकाविषयहै।चौपालमेंबैठकहोनेसेनकेवलएकदूसरेकाहालचालहोताथा।बल्किलोगएकदूसरेकेसुख-दुखमेंभीभागीदारबनतेथे।लोगोंकोचौपालकेप्रतिरुचिलेनेकीजरूरतहै।

फोटो-26-नकुपाल,महुपी,गढ़वा।-चौपालबीतेदिनोंकीबातबनचुकीहै।नईपीढ़ीकेलोगचौपालकीजरूरतकोनहींसमझरहेहैं।यहसभीकेलिएअच्छासंकेतनहींहै।जरूरतहैकिपंचायतप्रतिनिधिचौपालकीमहत्ताकोखुदसमझतेहुएनियमितरूपसेचौपालकीबैठकेंआयोजितकरानेकीदिशामेंठोसरूपसेपहलकरें।हालांकिअभीभीकईगांवोंमेंचौपालकाआयोजनपूर्वकीभांतिनियमितरूपसेकीजारहीहै।हमेंभीचौपालकेमहत्वकोसमझतेहुएइसेनियमितरूपसेप्रभावीबनानेकेप्रतिपहलकरनीचाहिए।

फोटो-27-अखिलानंदचौबे,हूर,गढ़वा।