मुजफ्फरपुर,अजयपांडेय।सहजऔरसरलप्रवृत्तिकीअद्भुतशख्सियत...कथकसम्राटपंडितबिरजूमहाराज।चपलगतियोंमेंसमाईंमुद्राएंमनकोझकझोररहीहैं।उनकेजानेसेमनभारीहै,एककसकपैदाहोरहीकिमिथिलाभ्रमणकीउनकीइच्छापूरीनहींकरपाया।दरभंगानिवासीओडिसीनृत्यकलाकारजयप्रकाशपाठकअपनेउनजुड़ावोंकोयादकरतेहैं,जिनकीशुरुआत2008मेंदिल्लीसेशुरूहुईथी।कहतेहैं,2018मेंपटनामेंआखिरीबारमुलाकातऔरढेरोंबातजीवनभरकीपूंजीबनगई।अबतोइसेसहेजलेनाहै।

दरभंगामहाराजकेयहांपारिवारिकसमारोहमेंआएथेबिरजूमहाराज

जयप्रकाशबतातेहैंकि12अक्टूबर,2018कोपटनाकेमौर्याहोटलमेंगुरुजीसेआखिरीबारमिलेथे।वेपटनामेंनिनादनृत्यअकादमीकीओरसेआयोजितकथकनृत्यकार्यशालामेंएकसप्ताहकेलिएआएथे।संस्थाकीओरसेमैंभीआमंत्रितथा।उनसेमिलनेकीइच्छाव्यक्तकीतोउन्होंनेशाममेंअपनेकमरेमेंबुलावाभेजा।गुरुजीकामुझसेमिलनासहजतादर्शारहीथी।पाग,संस्थासृष्टिकीस्मारिकाऔरदोपटा(अंगवस्त्रम्)भेंटकीतोउन्होंनेकहा,पाठकतुमनेमुझेमिथिलाकेमोहपाशमेंबांधलिया...बताओवहांकाभ्रमणकबकरारहेहो?1968मेंदरभंगामहाराजकेयहांएकपारिवारिकसमारोहमेंगयातोथा,परमिथिलानगरीनहींदेखपाया।अबमाताजानकीकीजन्मस्थलीऔरमिथिलानगरीदेखनेकीप्रबलइच्छाहोरही।मैंनेतत्कालकहा,गुरुजीअभीसमयऔरमौसम,दोनोंअनुकूलहैं।तीनघंटेमेंपहुंचजाएंगे।इसपरवेतपाकसेबोले-अरेजेपी,मेरास्वास्थ्यप्रतिकूलहै।कमरदर्दसेपरेशानहूं।गाड़ीयाट्रेनसेलंबासफरनहींकरपाता।तुम्हारेयहांहवाईजहाजनहींउड़ता?उसवक्तमायूसीहुईथी।दरभंगाएयरपोर्टचालूहोतातोगुरुजीकोनिश्चितदरभंगाऔरमिथिलाकीविरासतदिखापाता।वर्ष2020मेंएयरपोर्टशुरूहोनेकेबादसंतोषहुआ,लेकिनकोरोनासंक्रमणकीवजहसेउनकेआनेकाकार्यक्रमनहींबनपाया।

इसेबहुतआगेतकलेजाना...

गुरुजीकहतेथे,अपनेयहांनृत्यकीजड़ेंप्राचीनपरंपराओंमेंहैं।तुमअपनीकलाकेमाध्यमसेएकपरंपराकोआगेलेजारहेहो।तुमइसकेध्वजवाहकहो।तुम्हारेकंधेपरबड़ीजिम्मेदारीहै।उनकीबातेंआजभीऊर्जाकासंचारकरतीहैं।मेरेमनमेंअबयेग्लानिजीवनभररहेगीकिउनकीएकइच्छामैंपूरीनहींकरपाया।वहांसेचलतेसमयसिरपकड़करउनकादियाहुआआशीर्वादईश्वरीयवरदानसेकमनहीं।

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