नईदिल्‍ली,जेएनएन।BenefitsofSuryaNamaskarशक्तिमानवनिरोगीतनप्रदानकरनेवालामानाजाताहैसूर्यदेवको।योगमेंसूर्यनमस्कारकोविशिष्टस्थानदियागयाहै,यहयोगकाप्रारंभभीहैऔरशरीरकासंपूर्णव्यायामभी...

पहली:सुबहदैनिकक्रियाकेबादहल्केकपड़ेपहनकरउगतेहुएसूर्यकीतरफमुंहकरकेसीधेखड़ेहोजाएं।इसकेपश्चातदोनोंहाथनमस्कारकीमुद्रामेंजोड़करआंखेंबंदकरकेअपनेहाथोंकासीनेपरदबावबनातेहुएहाथकीबीचवालीअंगुलीकोठोढ़ीसेस्पर्शकराएं।

दूसरी:गहरीसांसलेतेहुएदोनोंहाथोंकोसिरकेऊपरलेजाकरकमरसेपीछेकीओरधीरेसेझुकतेहुएसांसरोककरजितनासंभवहोसके,रुकें।

तीसरी:इसकोपादहस्तआसनभीकहतेहैं।इसमेंसांसकोधीरे-धीरेछोड़तेहुएआगेकीओरझुककरदोनोंहाथोंकोपंजोंकेबगलमेंरखतेहैं।इसकेबादमाथेकोघुटनोंसेलगातेहैं।

चौथी:इसमेंबाएंपैरकोपीछेकीतरफलेजातेहैं।इसकेबाददाहिनेपैरकोघुटनेसे90अंशपरमोड़तेहुएदोनोंहाथोंकोपंजेकेबगलमेंजमीनपररखतेहैं।इसदौराननिगाहसामनेऔरगर्दनसीधीरखें।

पांचवीं:दोनोंहाथोंकोसांसभरतेहुएऊपरकीओरउठाएं।इसकेपश्चातकमरसेज्यादासेज्यादापीछेकीतरफझुकतेहुएसांसरोककरअपनीक्षमताअनुसाररुकें।

छठवीं:सांसछोड़तेहुएदोनोंहाथोंकोफिरसेपैरकेबगलमेंरखतेहैंऔरफिरउछलतेहुएपैरोंकीस्थितिमेंपरिवर्तनकरतेहैं।इसमेंआगेवालेपैरकोपीछेऔरपीछेवालेपैरकोआगेलेजाकरसामनेकीओरदेखतेहैं।

सातवीं:इसमेंभीपांचवींकीतरहहीगहरीसांसभरतेहुएदोनोंहाथोंकोसिरकेऊपरलेजाकरकमरसेपीछेकीओरझुककरजितनासंभवहोसकेरुकें।

आठवीं:इसमेंसांसछोड़तेहुएदोनोंहाथोंकोपैरकेबगलसेरखकरआगेवालेपैरकोभीपीछेलेजातेहैं।पैरोंकेघुटनेवरीढ़कोसीधारखकरपैरकीएड़ियोंकोजमीनसेलगाकररखनाहै।

नौवीं:इसमेंसांसछोड़तेहुएदोनोंहाथोंकोकंधेकेबगलमेंरखतेहुएसीनेकोजमीनकीतरफलेजातेहैं।इसमेंमस्तक,कंधा,हाथ,सीना,दोनोंघुटनेवपैरकेपंजेजमीनसेस्पर्शकरतेहैं,लेकिनपेटजमीनसेस्पर्शनहींहोनाचाहिए।इसअवस्थाकोअष्टांगप्रतिपादासनकहतेहैं।

दसवीं:सूर्यनमस्कारकीइसअवस्थाकोसर्पासनभीकहाजाताहै।इसमेंदोनोंहाथकंधेकेबगलमेंरखकरसांसभरतेहुएनाभिसेआगेवालेभागकोऊपरउठातेहुएकमरसेपीछेकीओरमोड़देतेहैं।इसकेपश्चातआसमानकोनिहारतेहुएरुकतेहैं।

ग्यारहवीं:इसमेंसांसछोड़तेहुएवापसआतेहुएउछलकरमाथेकोपैरकेघुटनोंसेस्पर्शकरातेहैंऔरतीसरीअवस्थाकीतरहइसस्थितिमेंभीसामथ्र्यअनुसाररुकतेहैं।

बारहवीं:सीधेहोकरदोनोंहाथोंकोगोलाकारघुमातेहुएनमस्कारकीमुद्रामेंजोड़तेहैं।इसकेपश्चातसीनेपरहाथोंकादबावबनातेहुएभगवानसूर्यकोनमनकरतेहुएसामान्यअवस्थामेंआजातेहैं।

[5प्रमुखलाभ:सुडौलशरीर,मजबूतमेरुदंड,बेहतरपाचन,एकाग्रमन,विश्रांति]

By Doyle