संवादसूत्र,सुलतानपुर:डॉ.राममनोहरलोहियाअवधविश्वविद्यालयफैजाबादकेकुलपतिप्रो.मनोजदीक्षितकामाननाहैकिरामचरितमानससेअच्छामनोविज्ञानदुनियाकीकिसीकिताबमेंनहींहै।भारतीयसंस्कृतिनेअपनेमूल्योंवसिद्धांतोंकेबलपरसदैवदुनियामेंअपनावर्चस्वकायमकियाहै।येबातेंउन्होंनेकमलानेहरूभौतिकएवंसामाजिकविज्ञानसंस्थानकेफरीदीपुरस्थितपरिसरमेंआयोजितराष्ट्रीयसंगोष्ठीकेसमापनअवसरपरकहीं।संगोष्ठीकाविषयथा,'वैश्वीकरणकेचलतेबदलीमनोवृत्तिवमानवीयव्यवहार'।प्रो.दीक्षितनेकहाकिअधिकारोंसेजुड़ावनहीटूटनहोतीहै।हमनेअधिकारोंकीइतनीचर्चाकरदीकिदायित्वबोधगायबहोगए।जबकिदायित्वबोधसेहीपरिवार,समाजऔरराष्ट्रमहानताकीओरबढ़तेहैं।हमारेबीचआपसमेंसमझकाक्षरणहुआहै।इसलिएविकृतियांबढ़ीहैं।अविविशिक्षकसंघकेअध्यक्षडॉ.बीपी¨सहनेकहाकिवैश्वीकरणकाविचारभारतनेदिया।भारतीयवैश्वीकरणसिद्धांतसेकिसीकाभीबुरानहींहोता।दुनियासुखीहोतीहै।संगोष्ठीकासंचालनकरतेहुएसमालोचकडॉ.राधेश्याम¨सहनेकहाकिहमारीहंसीऔररुदनसबआभासीयहोगएहैं।बाजारऔरसंचारकेमेलनेसबकुछविकृतकरदियाहै।आचार्यविश्वनाथपाठकशोधसंस्थानअध्यक्षडॉ.¨वध्यमणिनेआभारजताया।कार्यक्रमकोउपप्राचार्यडॉ.सुशीलकुमार¨सह,प्राचार्यडॉ.एकेश्रीवास्तव,विविकेप्राक्टरडॉ.एसएनराय,ज्ञानेंद्रविक्रमआदिनेभीसंबोधितकिया।

By Duffy