सीतामढ़ी।धानरोपनीकेलिएहरियाणा-पंजाबपलायनकरनेवालेखेतिहरमजदूरोंकादर्दएकपुस्तककेजरियेहमजानसकतेहैं,जोपिछलेसाललॉकडाउनकेसमयप्रकाशितहोकरबाजारमेंआईथी।इसपुस्तककानामहै-'रुकतापुर'।इसकिताबकेलेखकपुष्यमित्रहैं।इसमेंहालातकातथ्यपरकविश्लेषणकियागयाहै।पताचलाकिउनदिनोंपंजाब-हरियाणामेंधनरोपनीकासीजनथा,सारेमजदूरवहींगएथे।मगर,नियतिकोकुछऔरहीमंजूरथा।इसबारगएतोशरीरलौटामगरप्राण'रुकतापुर'मेंहीरूकगए।उत्तरप्रदेशकेबाराबंकीमेंलखनऊ-अयोध्याहाइवेपरहुएबसहादसेमेंएकसाथपांचलोगोंकीजानचलीगई,दर्जनभरजख्मीहोगए।लॉकडाउनमेंरोजी-रोजगारकीतंगीकेचलतेऐसेतमाममेहनतकशखेतीहर-मजदूरहरकीमतपरपंजाबयाहरियाणाचलेजानाचाहतेहैं,क्योंकिवहांधनरोपनीवकटनीकीअच्छीमजदूरीमिलतीहै।वहांकेकिसानबिहारीमजदूरोंकासम्मानकरतेहैं।उन्हेंसुविधाएंभीदेतेहैं।यहहमसभीलोगोंनेलॉकडाउनमेंअपनीआंखोंसेदेखाऔरसुनाभी।जबइसलिएहरसालरोपनीऔरधनकटनीकेमौकेपरपूरेराज्यसेलाखोंमजदूरहजारोंकिलोमीटरदूरमजदूरीकेलिएचलेजातेहैं।औरधनरोपनी-कटनीकेबादलौटआतेहैं।'रुकतापुर'सेसमझिएरोजी-रोटीकीजद्दोजहदमेंकितनीबाधाएंमजदूरोंकीराहमें'रुकतापुर'किताबइसलिएभीखासहैकिइसमेंबिहारकेउनआमलोगोंकेहालातकोकलमबंदकियागयाहै।जोविकासकेपथपरआगेबढ़नेकेलिएप्रयत्नशीलतोहैंमगरउनकीराहोंमेंकितनीहीबाधाएंहैं।इसकेबहानेबिहारकेवंचिततबकेकीकहानियोंकोशब्ददिएगएहैंऔरसचकोसामनेलानेकाप्रयासकियागयाहै।नीतीशसरकारकेपिछलेकार्यकालमेंएकवक्तऐसाभीआयाथाजबमनरेगामेंलोगोंकोठीक-ठाककाममिलनेलगाथाऔरयहांकेमजदूरोंनेबाहरजानाबंदकरदियाथा।तबपंजाबऔरहरियाणाकेकिसानबिहारआकरबैठेरहतेथे।मजदूरोंकीखुशामदकरतेथे।उन्हेंअपनेयहांलेजानेकेलिएमोबाइलऔरटीवीगिफ्टकरतेथे।उसवक्तनसिर्फदूसरेराज्योंमेंबल्कि,बिहारमेंभीमजदूरीकीदरबढ़गई।इसकोरोनाकालमेंभीऐसाहीदिखा,जबदेशकेलगभगहरइलाकेकीलग्जरीबसेंमजदूरोंकोलेनेबिहारकेगांव-गांवमेंघूमतीनजरआई।लॉकडाउनकीवजहसेअचानकमजदूरोंकेलौटआनेसेउनकेलिएदिक्कतखड़ीहोगईथी।

By Doyle