(दिलशादसैफी),मुजफ्फरनगर।कहतेहैंकिमांकेकदमोंतलेस्वर्गहैतोपिताउसस्वर्गकाद्वारहै,लेकिनइसदुनियामेंबहुतबेटोंकेआमालइसजुमलेसेएकदमजुदाहैं।दयालपुरमस्थितवृद्धाश्रमरिश्तोंपरपड़ीबर्फकाजीवितउदाहरणहै।जिन्हेंबड़ेलाड़-प्यारसेपाल-पोषकरसमाजमेंदायित्वनिभानेयोग्यबनाया।वहींमां-बापकीसेवाकाकर्तव्यभूलबैठेहैं।जीवनकेअंतिमपड़ावपरपहुंचेमाता-पिताकोबेसहाराछोड़दिया।अपनोंकेदीदारकेलिएतरसतीबूढ़ीआंखेंइसकीगवाहहैं।वृद्धाश्रममेंजीवनव्यतीतकररहे56वृद्धगैरोंकीबैशाखीकेसहारेखिलखिलारहेहैं।

अंतिमसंस्कारभीकररहीसंस्था

अलीगढ़कीग्रामीणविकाससेवासंस्थानयहांवृद्धाश्रमचलारहाहै।जिसमेंबुजुर्गोंकीसेहतकेसाथखान-पानकाख्यालरखाजाताहै।जीविततोछोड़िएयहांसांसेठहरनेजानेकेबादभीअपनोंकेकदमनहींपड़सकेहैं।

इसकेचलतेसंस्थाहीअंतिमसंस्कारकीजिम्मेदारीनिर्वाहनकररहीहै।आश्रममेंवृद्धोंकोमैन्यूकेआधारपरभोजनमिलताहै,लेकिनइसनिवालेकोनिगलनेकेलिएवृद्धआंसूओंकाघूंटपीतेहैं।अपनोंकायादकरफफकपड़तेहैं।

छलकउठतींहैआंखें,महसूसकरतेहैंदर्द

वृद्धाश्रममेंएक-दूसरेकादर्दबांटनेकेलिएवृद्धरोजानाएकत्रहोतेहैं।भोजनकेबादभजनसंध्या,गीत-संगीतकाआयोजनकरअपनेदिलकोबहलातेहैं।क्षणभरमेंगुजरासमययादआतेहीआंखेंछलकउठतीहै,दूरियोंकोदिलमहसूसकरताहै।यहांमुश्किलेंदूरगैरोंकीबैशाखीहै,जबकिआंसूपोंछनेकेलिएसंस्थाहै।हरिद्वारकीरामाबाईकेदोबेटेहैं,लेकिनउन्हेंकोईअपनेपासरखनेकोतैयारनहींहै।मुजफ्फरनगरकेबिजेंद्रकुमारकीउम्रपचासवर्षहोगई।एकबेटाहै,जोरोजानाकलहरखताहै।हालातकेआगेविवशहोकरयहवृद्धाश्रमकीशरणपहुंचगएहैं।मोहम्मदइकबालसमेत20सेअधिकवृद्धऐसेहैं,जिनकेकोईसंताननहींहै।अबउनकीबैशाखीआश्रमकेसेवादारबनगएहैं।अपनोंकेठुकराएजानेपरसरकरीतंत्रइनकाभरण-पोषणकररहाहै।

वृद्धाश्रमखतौलीवार्डनरेखासिंहनेबताया:वृद्धाश्रममेंवृद्ध-वृद्धाओंकोसभीसुविधाएंमुहैयाकराईजातीहै।सरकारीयोजनाओंकेसाथअनुदानकेभरोसेआश्रमचलरहाहै।कईवृद्धऐसेहैं,जिनकीकोईसंताननहींहै।वहकेवलआश्रमकीसेवाकेभरोसेहैं।

By Dyer