नालंदाकेमाड़ीगांवमेंएकऐसीमस्जिदहै,जहांकीरखवालीऔरदेखभालहिंदूकररहेहैं।इसमस्जिदकेप्रतिहिंदूकीभीउतनीहीआस्थाहै,जितनीकीमुस्लिमलोगोंकी।गांवमेंएकभीमुस्लिमनहींहै।शादीकेदौरानभीलोगसबसेपहलेमजारपरमाथाटेकतेहैं।उसकेबादहीशादी-विवाहकेरस्मकोआगेबढ़ायाजाताहै।

मस्जिदमेंकुल5टाइमकीअजानटेपरिकॉर्डरकेमाध्यमसेग्रामीणबजातेहैं।महीनेभरसेयहअजानअभीबंदहै,क्योंकिगांवकेजिन3लोगों(हिंदू)नेइसकीजिम्मेदारीलीथी,वोरोजगारकीतलाशमेंदूसरेराज्यगएहुएहैं।गांवमेंकुल500घरहैं,जिसमेंकुल100घरोंमेंमुस्लिमपरिवाररहतेथे।सभीरोजगारकीतलाशमेंगांवछोड़दूसरीजगहचलेगए।अभीभीमुस्लिमपरिवारसमय-समयपरअपनेगांवआतेहैं।

गांवकेबुजुर्गजानकीपंडितनेबतायाकिइसगांवकोकभीभीदंगेकीआंचनहींआनेदी।दोनोंसमुदायकेलोगबड़ेहीअदबसेइसगांवमेंरहतेथे।मस्जिदमेंमौजूदएकपत्थरकोलेकरबुजुर्गनेकहाकिअगरगांवमेंकिसीकोगलफुलीरोगहोताहै,तोवहमस्जिदमेंमौजूदपत्थरकोरगड़करइसमेंपानीडालकरअपनेगालोंपरलगालेतेहैं।इससेउनकायहरोगठीकहोजाताहै।

रिपोर्ट:सूरजकुमार।

By Dyer