शहरकेवार्डनंबर14स्थितमुक्तिधामआश्रममंदिरकेप्रतिलोगोंकीअपारआस्थाहै।वैसेतोमंदिरमेंहररोजपूजा-अर्चनाकरनेवालेश्रद्धालुओंकीभीड़लगीरहतीहै,लेकिननवरात्रमेंतोभक्तोंकातांतालगारहताहै।हररोजश्रद्धालुमंदिरमेंमाताकीपूजा-अर्चनाकरनेकेबादव्रतकीशुरुआतकरतेहैं।मंदिरमेंमाताकीप्रतिमाकाजलाभिषेककरकेपूजासामग्रीऔरचुनरीचढ़ातेहैं।यहांपरआनेसेभक्तोंकीसभीमनोकामनाएंपूरीहोतीहै।

मंदिरकाइतिहास:

मुक्तिधामआश्रममंदिरकापुरानाइतिहासहै।यहांपहलेमोक्षबनाहुआथा।जहांपरकरीब25वर्षपहलेदुधारीमहाराजरामचरणदासजीआएऔरउन्होंनेयहांकीकायापलटकरदी।रामचरणदासनेयहांभक्तोंकेसहयोगसेछोटेसेमंदिरकानिर्माणकराया,लेकिनआजमंदिरनेएकविशालरूपलेलियाहै,जिससेमंदिरकीमहत्ताबढ़नेकेसाथलोगोंकीआस्थाकाकेंद्रबनगयाहै।मंदिरमेंदेवीमांकानवदुर्गा,हनुमानजी,शिवपार्वतीपरिवार,संतोषीमांकीप्रतिमाएंहैं।इसकेसाथहीआश्रममेंशनिदेवसहितनवग्रहोंकामंदिरविशेषआकर्षणकाकेंद्रहै।विशेषअवसरोंपरमंदिरप्रांगणमेंभागवतकथा,अन्नकूटवश्रद्धालुओंकेभंडारेकाआयोजनकियाजाताहै।मंदिरप्रांगणमेंशिवरात्रि,जन्माष्टमी,नवरात्रसभीविशेषउत्सवोंपरपूजाकाविशेषकार्यक्रमकिएजातेहैं।

मंदिरकीमहत्ताकोलेकरयहांशहरकेअलावाआसपासकेगावोंकेलोगदर्शनोंकेलिएपहुंचतेहैं।शिवरात्रिऔरनवरात्रकेउपलक्ष्यमेंयहांमाताकाजागरणऔरहलवापूरीकाप्रसादभीबांटाजाताहै।नवरात्रशुरूहोनेसेपहलेहीमंदिरमेंसभीतैयारियांकरलीजातीहैं।मंदिरमेंबाहरसेआनेवालेश्रद्धालुओंकेलिएभीठहरनेकाप्रबंधव्यवस्थापकोंद्वाराकियाजाताहै।

ऐसेपहुंचेंमंदिर:

मुक्तिधामआश्रममंदिरपहुंचनेकेलिएजमालगढ़रोडमार्गसेहोतेहुएसैनीमोहल्लेसेहोकरजानापड़ताहै।सैनीमोहल्लेसेमंदिरकुछहीदूरीपरस्थितहै।बसअड्डेसेरिक्शालेकरमंदिरतकमात्र15मिनटमेंआसानीसेपहुंचाजासकताहै।

इसऐतिहासिकमंदिरकीविशेषमान्यताहै।नवरात्रमेंपूजा-अर्चनाकेलिएश्रद्धालुदूर-दूरसेआतेहैंऔरपरिवारएवंसमाजकल्याणकीकामनाकरतेहैं।दुर्गादेवीसच्चेभावसेपूजा-अर्चनाकरनेवालोंकेसबदुखहरलेतीहै।

दुधारीरामचरणदास,मंदिरमहंत।

नवरात्रमेंपूरेनौदिनश्रद्धालुओंकातांतालगनेसेस्पष्टहैकिलोगोंमेंइसकेप्रतिअपारआस्थाहै।मातारानीसभीकीझोलियांखुशियोंसेभरपूरकरे,ऐसीहमारीप्रार्थनाहै।लोगजिसआशाकेसाथमंदिरमेंआतेहैं,मातारानीउनकीसभीमुरादोंकोपूराकरतीहै।

चतुर्भुजदास,पुजारी।

By Ellis