जागरणसंवाददाता,औरैया:प्रकृतिनेहमेंअपनेविकारनिवारणकेलिएजलआदिअनेकरत्नउपहारमेंभेंटकिएहैं।जिनकाअस्तित्वसंभालकररखनाहमारीजिम्मेदारीहै।अनेकस्त्रोतोंसेजलपूरेजीवनमेंउपयोगकरतेरहतेहैं।जिसकामूल्यहमेंहीसमझनेकीजरूरतहै।हरएकबूंदकोसहेजनाहमाराकर्तव्यभीहै।जिसकानिर्वाहभीहमेंकरनाचाहिए।

शहरसेसटेग्रामसुरानमेंस्थितमंदिरपरपिछलेपांचवर्षसेजलकीएक-एकबूंदकोसहेजनेकाकामसेवानिवृत्तपुलिसकर्मीसोनेलालकररहेहैं।देवीमंदिरकीसाफसफाईपूजा-अर्चनावहस्वयंकरतेहैं।इसकेउपयोगमेंआनेवालाजलक्यारियोंकेसहारेफुलवारीवसब्जीउगानेमेंकरतेहैं।यहांदर्शनार्थआनेवालेभक्तोंकेहाथवचरणधोनेकेलिएजोपानीकीटोटियांलगाईगईहैं।इनसेपानीबर्बादनहो,इसकेलिएभीनालियांफुलवारीतकजातीहैं।किन्नू,नीबू,गुड़हल,गुलाब,बेला,चमेलीआदिकईप्रकारकेफूलवफलदारपौधेलहलहारहेहैं।जोमांदुर्गाकीपूजाअर्चनाकेउपयोगमेंलाएजातेहैं।इसपहलकोप्रेरणास्त्रोतमानकरभक्तअपनेघरोंमेंजलसंचयनपरगंभीरभीहैं।सरकारीसर्विसमेंरहतेहुएपर्यावरणवजलसंरक्षणकासंकल्पलियाथा।आजवहकरीबएकहजारवर्गफुटखुलीएरियामेंपौधोंवसब्जियोंकोउगाकरइसकाउपयोगकरतेहैं।सोनेलालकाकहनाहैकियदिसमयरहतेप्रकृतिकीधरोहरोंकोनहींसहेजागयातोमुश्किलेंऔरबढ़जाएंगी।क्योंकि,जिसप्रकारआसमानमेंबादलजरूरीहै,ठीकउसकीतरहधरतीपरहरे-पेड़पौधेवजलजरूरीहै।