जासं,महुली(सोनभद्र):होलीपर्वकीखुशियांजहांरासायनिकरंगोंमेंघुलतीजारहीहैवहींअबभीजनपदकाआदिवासीसमाजप्रकृतिकेरंगोंपरनिर्भरहै।उन्हेंविश्वासहै।आधुनिकताकीअंधीदौड़मेंकुछपरिवारभलेहीशामिलहोगएहोंलेकिन,बहुतायतमेंयहसमाजपारंपरिकरंगकोहीपिचकारीकाहिस्साबनाताहै।

दुद्धीतहसीलकेसबसेदुरूहवपहाड़ीइलाकाकरहिया,बोधाडीह,औराडंडी,बगरवातथानगवांआदिगांवोंमेंहजारोंसालकीपरंपराएंआजभीजिदाहैं।यहांकेमूलनिवासीचेरो,गोंड़,खरवार,परहियांजैसीआदिवासीजातियांपलाश(टेसु),फुलझड़ी,सेमलआदिकेफूलोंसेबनेरंगोंसेहोलीकापर्वमनातेहैं।आदिवासियोंकाकहनाहैकिहमलोगअबतकअपनेहाथोंसेप्राकृतिकफूलोंकेबनाएरंगोंसेहीहोलीखेलतेआएहैं,जोआजभीअनवरतचलरहाहै।हालांकिबढ़तेप्रदूषणतथाअंधाधुंधकटतेजंगलोंकेकारणअबपर्याप्तमात्रामेंफूलोंकामिलनाबड़ीमुश्किलहोगयाहै,फिरभीकिसीतरहसेअभीतककामचलायाजारहाहै।लोगोंनेबतायाकिप्राकृतिकफूलोंसेबनायागयारंगतथागुलालकाफीटिकाऊभीहोताहै।एकबाररंगलगजाएतोउसकीपहचानपूरेसालतकरहतीहै।सबसेखासबातकिप्राकृतिकरंगोंसेकभीभीकिसीकोकोईनुकसानयाचेहरेपरकोईदागनहींपड़ताहै।इसतरहसेतैयारहोताहैफूलोंकारंग

क्षेत्रकेदुरूहइलाकोंमेंआदिवासीहोलीखेलनेकेलिएअपनेहाथोंसेरंगोंकोतैयारकरतेहैं।पहलेपलाश,सेमलतथाफुलझड़ीआदिकीफूलोंकोतोड़करसुखानेकेबादअच्छीतरहसेकूटकरफिरबड़ेबर्तनमेंपानीकेसाथकाफीदेरतकउबालतेहैं।जबपानीगाढ़ाहोजाताहैतबकपड़ेसेछानकररंगकोसुखाकररखलेतेहैं।इसीतरहसेविभिन्नप्रकारकेफूलोंकोसुखाकरसीलबट्टेपरखूबमहीनपीसकरअबीरतैयारकियाजाताहै।आदिवासियोंनेबतायाकियहक्षेत्रशहरकेधूमधड़ामसेदूरलोगअपनेअलगअंदाजमेंत्यौहारमनातेहै।परंपरागतछापछोड़तीइनकीजीवनशैलीमेंथोड़ीभिन्नताजरूरहै,परंतुसीमितसंसाधनोंकेबावजूदएकताकापरिचयदेतेहैं।

By Dunn