विपिनपाराशर,वृंदावन(मथुरा):'अंगुलियांथामकेखुदचलनासिखायाथाजिसे,राहपरछोड़गयाराहपरलायाथाजिसे,उसनेपोछेहीनहींअश्कमेरीआंखोंसे,मैंनेखुदरोकरबहुतदेरहंसायाथाजिसे।'कुंवरबेचैननेमां-बापकेदर्दकोउकरेतेइसगीतकीरचनायूंहीनहींकीथी।जिनबच्चोंकोबुढ़ापेकीलाठीसमझपाल-पोसकरबड़ाकिया,मदर्सडेपरउन्हींअपनोंकीराहनिराश्रितमहिलाएंतकतीरहीं।

वृंदावनकेमहिलाआश्रयसदनोंमेंकरीब750विधवाएंरहरहीहैं।येवहमहिलाएंहैं,जिनकेपतिजिदगीकीसांझमेंदुनियाछोड़गए।बेटोंसेप्यारनमिला,तोयेमाताएंआश्रयसदनोंमेंआगईं।दूर-दूरसेआईंयेमाताएंअबकान्हाकेघरमेंअपनादरढूंढ़रहीहैं।जिदगीकेबचे-खुचेदिनअबआश्रयसदनोंमेंकटरहेहैं।मध्यप्रदेशकेसागरकीरहनेवालीनन्हींबाईकीजिदगीयूंहीयहांनहींकटरहीहै।तीनबेटेहैं,लेकिनसबअपनापरिवारपालतेहैं।मांकेआंचलतलेबड़ेहुए,लेकिनअबमांकोसिरछिपानेकेलिएछतउनकेपासनहींहै।मजबूरीथी,तोकईवर्षोंपहलेआश्रयसदनमेंआगईं,ईश्वरआराधनामेंसमयबीतरहाहै।आजमदर्सडेथा,लेकिनकिसीकोउनकीसुधनहींआई।अबतोकान्हाहीजीवनपारलगाएंगे।यहींकीरहनेवालीइंद्रवतीकीआंखेंबूढ़ीहोगईं,लेकिनअपनेबेटोंकेप्रतिप्यारसमायाहै।कहतीहैंकियेमेरादुर्भाग्यहैकिदोबेटोंकेहोतेभीबुढ़ापायहांकाटरहीहूं।दर्दबताते-बतातेआंखेंभरआईं।फिरबोलीं,ईश्वरकीसाधनाकेसहारेसबकटजाएगा।कानपुरकीगुलाबदेवीकईसालसेयहांरहरहीहैं।दोबेटोंकोलाड़-प्यारसेपाला,शादीकेबाददोनोंकोमांकीजरूरतनहींहुई।कहतीहैं,'मैंनेभीबच्चोंसेदूरीबनालीऔरसदनकोअपनाघरबनालिया।बच्चोंकीयादमुझेबहुतआतीहै,लेकिनउन्हेंनहीं।'एटाकीश्रीमतीशुक्लाकेतीनबेटेहैं,लेकिनकिसीकेपासमांकोरखनेकेलिएजगहनहीं।सागरकीउमादेवीकीबुढ़ापेकीतमामउम्मीदेंबेटोंकीबेरुखीसेआंखोंमेंहीदमतोड़गईं।कभीबच्चोंकीयादआतीहै,तोएक-दोदिनकेलिएचलीजातीहैं।

By Farrell