[ हृदयनारायणदीक्षित]:भारतकेवैभवकाअनुष्ठानराजनीतिहै।राष्ट्रजीवनसेजुड़ेआदर्शोंकेबिनालोकतांत्रिकराजनीतिसंभवनहीं।संविधाननिर्माताओंनेपूरीराजव्यवस्थाकाचित्रबनायाहै।संविधानमेंअनेकसंस्थाएंहैं।उनकासम्मानसबकाकर्तव्यहै।संसदीयजनतंत्रमेंराजनीतिकविचारधाराएंदलोंकेमाध्यमसेव्यक्तहोतीहैं।चुनावमेंकिसीदलयासमूहकोबहुमतमिलताहै।उसेपांचवर्षकेलिएकामकरनेकासंवैधानिकअधिकारहै।विपक्षसरकारकीआलोचनाकरताहै,लेकिनकुछसमयसेसरकारोंकेशासनकरनेकेअधिकारकोचुनौतीदीजारहीहै।विधायिकाद्वारापारितकानूनोंकोभीखारिजकियाजारहाहै।यहस्थितिसंवैधानिकजनतंत्रकेलिएभयावहहै।नीतिआयोगकीहालियाबैठकमेंओडिशाकेमुख्यमंत्रीनवीनपटनायकनेइसीनिराशाजनकराजनीतिपरदुखप्रकटकरतेहुएकहाकिप्रत्येकछोटी-बड़ीघटनाकाराजनीतिकरणहोरहाहै।सरकारोंकेप्रत्येककामकोवोटकेनजरियेसेदेखाजाताहै।पटनायकनेकहाकिपरिपक्वजनतंत्रमेंनिर्वाचितसरकारकोजनहितमेंकामकरनेकाअवसरमिलनाहीचाहिए।

भारतमेंछोटी-छोटीघटनाओंकाराजनीतिकरणहिंसकआंदोलनकारूपलेताहै

भारतकामाहौलवास्तवमेंचिंताजनकहै।यहांछोटी-छोटीघटनाओंकाभीराजनीतिकरणहोताहै।ऐसाराजनीतिकरणहिंसकआंदोलनकारूपभीलेताहै।कानूनव्यवस्थाकीस्थितिखराबहोतीहै।भारतकीविश्वप्रतिष्ठा,समृद्धिऔरआत्मनिर्भरताराष्ट्रीयमहत्वाकांक्षाहै।सबकोसाथलेकरसबकाविकासप्रधानमंत्रीमोदीकाएजेंडाहै,लेकिनयहांप्रधानमंत्रीकीगरिमाकाभीध्यानरखानहींजाता।प्रधानमंत्रीकीगरिमाऔरअधिकारसंपन्नताकेऔचित्यपरडॉ.आंबेडकरनेसंविधानसभामेंकहाथा,‘प्रधानमंत्रीमंत्रिपरिषदकेभवनकीनींवहै।जबतकहमउसेऐसीअधिकारपूर्णस्थितिप्रदाननकरसकेंतबतकमंत्रिमंडलकीजवाबदेहीतयनहींहोगी।’कल्पनाओंकाभीराजनीतिकरणआश्चर्यजनकहै।कुछसमयपहलेकाल्पनिकसहिष्णुताकाप्रेतप्रचारितकियाजारहाथा।नकारात्मकराजनीतिकेपक्षधरसिद्धकररहेथेकिभारतमेंघोरअव्यवस्थाहै।संविधानविहीनताहै।

असहिष्णुताकेमुद्देकोअंतरराष्ट्रीयबनायागया

असहिष्णुताकेमुद्देकोअंतरराष्ट्रीयबनायागया।राष्ट्रहितकीक्षतिहुई।विदेशनीतिपरभीऐसीराजनीतिद्वारानकारात्मकटिप्पणियांकीजातीहैं।पूछाजाताहैकिचीनीसेनाकीवापसीकेप्रमाणक्याहैं?नकारात्मकअभियानकेकारणराफेलपरभीगैरजिम्मेदारबयानबाजीहुईऔरबोफोर्सतोपोंपरभी।पाकिस्तानपरहुईसर्जिकल स्ट्राइकपरभीभारतकीप्रतिष्ठागिरानेवालेबयानदिएगए।कोरोनामहामारीपरभारतसरकारकेकार्योंकीप्रशंसाविश्वस्वास्थ्यसंगठननेभीकीहै।दुनियाप्रशंसाकररहीहै,लेकिनयहांकभीटीकेपरशंकाउठाईजातीहैऔरकभीलॉकडाउनकेसमयकोलेकर।

भारतमेंराजनीतिऔरराजव्यवस्थाकाविकासप्राचीनकालसेहै,ब्रिटिशसंसदकाजन्मबादमेंहुआ

भारतकीराजनीतिकनियतियहनहींहै।यहांराजनीतिऔरराजव्यवस्थाकाविकासप्राचीनकालमेंहीहोगयाथा।ब्रिटिशसंसदकाजन्मऔरविकासबादमेंहुआ।ऋग्वेद,यजुर्वेदमेंसमृद्धराष्ट्रकीअभिलाषाएंहैं।अथर्ववेदमेंकहागयाहैकिराज्यसंस्थाकाक्रमिकविकासहुआहै।प्राचीनराजव्यवस्थामेंराजासभासमितिकेप्रतिजवाबदेहथा।ऋषियोंकेतपबलसेराष्ट्रकाजन्महुआ।राष्ट्रऔरराजनीतिकोजन्मदेनेवालेयेऋषिवस्तुत:उससमयकेराजनीतिककार्यकर्ताहैं।यहांराजधर्मयानीतिशास्त्रकाविकासकमसेकमछहहजारवर्षपहलेहीशुरूहोगयाथा।कौटिल्यकाअर्थशास्त्रईसासे340वर्षपूर्वकामानाजाताहै।कौटिल्यनेअपनेपूर्ववर्तीराजनीतिकचिंतकोंवृहस्पति,शुक्राचार्य,भारद्वाज,पराशरआदिकेउल्लेखकिएहैं।शुक्रनीतिमेंउल्लेखहै,‘नियुक्ति-पदोन्नतियोग्यताऔरकार्यकेआधारपरहीहोनीचाहिए।जातियाकुलकेआधारपरनहीं।जातियांश्रेष्ठताकीमापदंडनहींहैं।’प्राचीनभारतमेंराजनीतिशास्त्रकेकईनामथे।इसेदंडनीति,अर्थशास्त्रऔरराजधर्मआदिनामोंसेजानाजाताथा,लेकिनसबसेज्यादालोकप्रियनामथानीतिशास्त्र।नीतिवस्तुत:राज्यकीनीतिहै।राजामेंलोकसंग्रहऔरनेतृत्वकागुणजरूरीबतायागयाहै।नेताहीजनताकोगतिशीलकरताहै।गतिशीलसमाजप्रगतिशीलहोताहै।शुक्रनीतिकेअनुसारराजाकेसुयोग्यनेतानहोनेकेकारणप्रजाविपत्तिकीनावमेंडूबजातीहै।महाभारतशांतिपर्वमेंसमाजसेवाव्यक्तिनिर्माण,राष्ट्रनिष्ठाआदिआधारभूतसांस्कृतिकतत्वोंकोराजनीतिसेजोड़ागयाहै।

समाजव्यवस्थाइकहरीनहींहोती,समाजकीएकसंस्कृतिहोतीहै,एकदर्शनहोताहै

समाजव्यवस्थाइकहरीनहींहोती।समाजकीएकसंस्कृतिहोतीहै।एकदर्शनहोताहै।एकअर्थनीतिहोतीहैऔरसभीप्राप्तियोंकेलिएएकव्यावहारिकराजनीतिभीहोतीहै।राजनीतिकोसंस्कृतिऔरनैतिकताकेबंधनऔरमर्यादामेंरहनाचाहिए।मर्यादाकाअनुशासनसंविधानहै।संविधानमेंमूलकर्तव्यभीहैं,लेकिनध्येयशून्यराजनीतिसमाजनिर्माणकेआदर्शपरआक्रामकहैं।शाहीनबाग,नागरिकतासंशोधनकानूनविरोध,किसानआंदोलनजानबूझकरतिलकाताड़बनाएगएहैं।मूलभूतप्रश्नहैकिविधिनिर्वाचितसरकारेंजनहितमेंअपनीकार्यसूचीक्योंनहींचलासकतीं?अल्पमतबहुमतवालीसरकारपरअपनानिर्णयकैसेथोपसकताहै?यहआदर्शराजनीतिनहींहै।प्रधानमंत्रीभीकईअवसरोंपरऐसीहीबातेंकरचुकेहैं।

संकीर्णराजनीतिमाहौलखराबकरतीहै

संकीर्णराजनीतिमाहौलखराबकरतीहै।संप्रतिभारतमेंसमूचीराजनीतिकोहेयमानाजाताहै।इसकारणअच्छेराजनीतिककार्यकर्ताभीउचितसम्माननहींपाते।आमधारणामेंसबधानबाईसपसेरीहैं।गांधी,लोहिया,आंबेडकर,दीनदयालउपाध्यायनेसार्वजनिकजीवनकीमर्यादाएंखींचीथीं।लोहियानेदीर्घकालीनराजनीतिकोधर्मबतायाथा।राजनीतिराष्ट्रनिर्माणकीदीर्घकालीनतपसाधनाहै।आरोप-प्रत्यारोपकाखेलनहीं।जनतंत्रमेंसत्तापक्षऔरविपक्षशत्रुनहींहोते,लेकिनअभीयहीशत्रुताहै।ऐसीराजनीतिसेसमाजपरबुराप्रभावपड़ताहै।राष्ट्रीयविमर्शकेमुद्देपाश्र्वमेंचलेजातेहैं।आर्थिक समृद्धिकोहमेशाराष्ट्रीयविमर्शमेंरहनाचाहिए।शिक्षा,स्वास्थ्य,सुरक्षाऔरराष्ट्रीयएकताएवंअखंडतामहत्वपूर्णविषयहैं।

विपक्षकोसरकारकीआलोचनाकाअधिकारहै,आलोचनातथ्यगतऔरलोकहितसेप्रेरितहोनीचाहिए

विपक्षकोसरकारकीआलोचनाकाअधिकारहै।आलोचनातथ्यगतऔरलोकहितसेप्रेरितहोनीचाहिए।तथ्यहीनआलोचनामाहौलखराबकरतीहै।इससेअनावश्यकतनातनीहोतीहै।देशहमेशातनावमेंरहताहै।ऐसेलोगदेशकोविकासमोडमेंनहींआनेदेनाचाहते।येगंभीरप्रश्नहैं।यहराजनीतिकेलिएआत्मचिंतनकाअवसरहै।

(लेखकउत्तरप्रदेशविधानसभाकेअध्यक्षहैं)

By Dunn