[गिरीश्वरमिश्र]।भारतकीविचार-परंपरामेंस्वतंत्रचिंतनकीजड़ेंअत्यंतप्राचीनऔरगहरीहैं।दर्शनकेक्षेत्रमेंविभिन्नप्रश्नोंकोलेकरवाद-विवादएकआमसीबातहै।यहांवाद-विद्याअपनेआपमेंज्ञानकीएकशाखाकेरूपमेंविकसितहुईथी।भिन्नमतोंकेबीचशास्त्रार्थकीकथाएंभीप्रसिद्धहैं।निकटअतीतमेंस्वतंत्रतासंग्रामकेदौरानभीलोकजीवनमेंविभिन्नमुद्दोंपरविमर्शकेदौरचलतेरहे।संविधानसभामेंभीभिन्नविचारवालोंकोशामिलकियागयाथा।

कहाजासकताहैकिभारतीयलोकतंत्रकाजन्मएकउत्कृष्टकिस्मकेराजनीतिकविमर्शकीपरिणतिहै।अपनेनिजीअनुभवोंऔरविभिन्नदेशोंकेविचारोंकालाभउठातेहुएसंविधानसभानेबाबासाहबडॉ.आंबेडकरकेसहयोगसेभारतकेलिएजिससंविधानकानिर्माणकियावहएकउच्चकोटिदस्तावेजहै।संविधानसभामेंभारतकेसामाजिक,धार्मिकऔरवैचारिकविविधताकाप्रतिनिधित्वकरनेवालेसदस्यशामिलथे।निजीऔरदलगतविचारभिन्नहोतेहुएभीउन्होंनेएकनएराज्यकीसंवैधानिकव्यवस्थाकाखाकातैयारकियाऔरगहनतथाखुलेमनसेकिएगएविचार-विमर्शकेबादसहमतिपरपहुंचे।

कार्यदिवसोंकीसंख्याघटतीगई

स्वतंत्रतामिलनेकेपहलेऔरबादकेकुछवर्षोंतकभारतीयसंसदमेंविभिन्नमुद्दोंकोलेकरउच्चस्तरकाविचार-विमर्शहोताथा।यदिकोईसांसदअच्छावक्तव्यदेताथातोपार्टीलाइनसेहटकरउसकीतारीफभीकीजातीथी।आलोचनाओंकोसुननाऔरउनकोगुनकरअपनेमेंबदलावलानाअस्वाभाविकनहींथा।धीरे-धीरेसंसदऔरविधानसभाओंकाउदारवैचारिकमाहौलबिगड़नेलगा।इनसंस्थाओंकेकार्यदिवसोंकीसंख्याघटतीगईहै।इसस्थितिकेचलतेबहुतसेकाम-काजबिनाआवश्यकविचारकिएफटाफटनिपटादिएजातेहैं।

बिहार,हरियाणाऔरपश्चिमबंगालकीविधानसभाओंमेंलगभगबिनाविचारकिएबिलप्रस्तुतकरनेऔरतत्कालपासकरनेकीघटनाएंआमहोचुकीहैं।संसदीयसमितियांकीकार्यप्रणालीभीबहुतसंतोषजनकनहींहै।आवश्यकसंसाधनों,तत्परताकीकमीऔरविशेषज्ञताकेअभावसेवेठीकढंगसेकामनहींनिपटापातीं।

धनबलकीबदौलतसंसदमेंपहुंचतेहैंसासंद

आजकलकुछहीसांसदप्रबुद्धऔरविशेषज्ञहोतेहैं।केवलवेहीचर्चाकीगुणवत्ताकोबढ़ातेहैं।जोजातिबल,बाहुबलयाधनबलकीबदौलतसंसदमेंपहुंचतेहैंवेबहसमेंकोईयोगदाननहींकरते।उनमेंसेकईऐसेभीहोतेहैंजोपूरेकार्यकालमेंकोईसवालभीनहींपूछते।ज्यादातरसांसदपार्टीकीबातकोदोहरानाहीअपनाधर्ममानतेहैं।

संप्रगशासनकेदौरमेंपार्टीनेतासोनियागांधीऔरपूर्वप्रधानमंत्रीडॉ.मनमोहनसिंहसंसदमेंबहुतकमबोलतेथे।वेमीडियासेभीदूररहतेथे।वेअपनीअच्छीनीतियोंकेलिएभीजन-समर्थननहींजुटापातेथे।मोदीसरकारइसदृष्टिसेमुखरतथासक्रियहै।संसदीयकार्यकीदृष्टिसेभीउसकीउपलब्धियांउल्लेखनीयहैं।

जनहितकीबातसोचनीचाहिए

राजनीतिकविमर्शकेलिएसंस्थाओंकेमानकोंकीरक्षाऔरभरपूरआदरहोनाचाहिए।उदाहरणकेलिएराज्यऔरशासनभिन्नऔरपरस्परसंबंधितसंस्थाएंहैं।पूरेसमाजकेप्रतिनिधित्वकादायित्वहोनेकेकारणराज्यकोहरतरहकेभेद-भावसेऊपरउठकरनिष्पक्षऔरतटस्थरूपसेजनहितकीबातसोचनीचाहिए।शासनतंत्रऔरन्यायालयआदिकेलिएनिष्पक्षता,नियमपालनआदिबेहदमहत्वपूर्णहोतेहैं।ऐसीस्थितिमेंराजनीतिकहितऔरदेशहितकेबीचसंतुलनबनानाजरूरीहोताहै।

आजसत्ताकेलिएहरतरहकेसमझौतेहोरहेहैं।एकराजनीतिकदलऔरउसकीसरकारकेबीचकाअंतरबनाएरखनाजरूरीहै,क्योंकिसरकारपूरेदेशकेलिएहोतीहै,जबकिपार्टीकादायरासीमितहोताहै।सरकारीतंत्रकापार्टीकेलिएदुरुपयोगकिसीभीतरहन्यायसंगतनहींठहरायाजासकता।समानता,समताऔरबंधुत्वजैसेलक्ष्योंकीप्राप्तिकेलिएसरकारकोखुलेमनसेसबकेलिएऔरसबकेसाथमिलकरकार्यकरनाजरूरीहोताहै।

शिक्षाजैसाअतिमहत्वपूर्णविषयचर्चाकाविषयनहींबनपाता

विमर्शकाएकआयामनीतियोंकेलिएपरामर्शयासंसदमेंचर्चाकरनाभीहै।कईबारसरकारद्वाराव्यापकमहत्वकेअंतरराष्ट्रीयकरारऔरदूरगामीव्यापारिकफैसलेबिनासंसदमेंबहसकेलेलिएजातेहैं।दूसरीओरशिक्षाजैसासामाजिकदृष्टिसेअतिमहत्वपूर्णविषयकभीभीगंभीरचर्चाकाविषयहीनहींबनपाता।

पांचसालसेशिक्षानीतिकामसौदाबनरहाहै।अभीभीयहपूरानहींहुआहै।सरकारनेवर्षोंसेशिक्षापर‘सेस’लगारखाहै,परंतुजमीनीहकीकतयहहैकिशिक्षाकेलगभगहरस्तरपरअध्यापकोंकीकमीबनीहुईहै।संसाधनोंकाअभावहै।कुशलताकेअभावमेंशिक्षारोजगारदिलानेमेंअसफलहोरहीहै।मातृभाषाकोशिक्षाकामाध्यमबनानेकाप्रश्नइसराष्ट्रकेसामनेज्योंकात्योंमुंहबाएखड़ाहै।

देशकेभविष्यसेजुड़ामुद्दा

शिक्षाकेअनियंत्रितनिजीकरणकीअपनीकहानीहै।शायदसरकारीसोचयहहैकियदिऔरसबठीकहोजाएगातोशिक्षाखुदठीकहोजाएगी,जबकिबातठीकउल्टीहै।यदिशिक्षाठीकहोजाएतोबहुतसारीसमस्याओंकासमाधानहोसकेगा।शिक्षापूरेदेशकेवर्तमानऔरभविष्यसेजुड़ामुद्दाहै।शिक्षाकेप्रतिउदासीनताआजघातकसिद्धहोरहीहै।

लोकतंत्रमेंविमर्शकेस्वरूपकोनिर्धारितकरनेमेंमीडियाकीभूमिकाकोभीनजरअंदाजनहींकियाजासकता।कुछथोड़ी-सीअच्छीपत्रिकाओंकेअलावादैनिकसमाचारपत्रऔरइलेक्ट्रॉनिकमीडियाहमारेसामनेएकमिश्रितचित्रप्रस्तुतकरतेहैं।कुछतोअच्छेहैं,परज्यादातरप्रबुद्धपाठकयादर्शककोनिराशकरतेहैं।

नहींकीजासकतीविकासकीअनदेखी

फैशनऔरसंभ्रांतजनोंपरमीडियाद्वाराअधिकध्यानदियाजाताहै,जबकिगरीबों,गावोंऔरउपेक्षितोंपरबहुतकमनजरपड़तीहै।फलत:विरोधऔरप्रतिकारकाजरूरीपक्षदबाहीरहताहै।ऐसेमेंविचारोंकीसिकुड़तीपरिधिऔरसघनविचारकीपरंपरादुर्बलहोनेकेसाथदेशकीनैतिकऔरराजनीतिकसंस्कृतिमेंक्षरणकेलक्षणदिखनेस्वाभाविकहैं।कुलमिलाकरउच्चआर्थिकछलांगकेलिएतत्परआजकेभारतमेंराजनीतिकआचार,नैतिकताऔरलोकतंत्रकीरक्षातथाविकासकीअनदेखीनहींकीजासकती।इसकेलिएलोकमेंविमर्शकीसंस्कृतिकोपुष्टकरनाहीहोगा।

(लेखकपूर्वप्रोफेसरएवंपूर्वकुलपतिहैं)

By Doherty