अयोध्या(रघुवरशरण):संस्कार,संवेदनाऔरसरोकार।येमहजशब्दहीनहींहैं,पूरीकीपूरीपीढ़ीकेजीवनकोआलोकितकरनेकासूत्रहै।इसकीप्रामाणिकताकेसरीनंदनसेवासंस्थानकीओरसेसंचालितस्कूलसेपरखीजासकतीहै।रामनगरीसेलगेअत्यंतपिछड़ेतिहुरामाझाक्षेत्रमेंइसस्कूलकीनींवरखनाहीटेढ़ीखीरथा।शिक्षाकेआलोकसेअनभिज्ञअभिभावकोंकोयहस्वीकार्यनहींथाकिकाम-काजमेंसहयोगीबच्चोंकोउससेअलगकरपढ़ाई-लिखाईमेंलगायाजाय।पढ़ाईऔरफीसकाखर्चवहनकरनेकोतोवेकिसीभीकीमतपरतैयारनहींथे।इसकेबावजूदअज्ञानकाअंधेरादूरकरनेकेलिएसंकल्पितसमाजसेवियोंकीटोलीनेहारनहींमानीऔरसवादोदशकपूर्वउन्होंनेजोदीपजलायाथा,वहमशालबनकरहजारोंनौनिहालोंकामार्गप्रशस्तकररहाहै।इसअभियानमेंकेंद्रीयभूमिकाकानिर्वहनकरनेवालेराष्ट्रीयस्वयंसेवकसंघकेवरिष्ठप्रचारकध्रुवयाददिलातेहैंकिशुरुआतडेढ़बीघाभूमिखरीदेजानेसेहुई।इसकेलिएएकलाखरुपयेअदाकरनेथे।आजकेहिसाबसेयहकीमतबहुतकमहै,परतबइसकीव्यवस्थाकरनाहीबहुतकठिनथा।यहसंभवहुआ,तोसाकेतवासीसंतनारायणदास'बगहीबाबा'एवंमानसकोकिलकेउपनामसेविख्यातरामायणीरामदासजैसेदिग्गजसंतोंकीप्रेरणाएवंजनसहयोगसे।विद्यालयकेलिएभवननिर्माणकीबारीआई,तोआइआरएसअधिकारीगिरीशनारायणपांडेयआगेआए।आजभीवेइसविद्यालयकीरीढ़साबितहोरहेहैं।इसकेसाथध्रुवएवंउनकेसहयोगियोंकाविश्वासबढ़तागया।प्रवेशकेलिएजागरूकताअभियानछेड़ागयाऔरइसीकेपरिणामस्वरूपपहलेसत्रमेंही165बच्चोंकाविद्यालयमेंप्रवेशहुआ।जोअभिभावकफीसदेनेमेंसक्षमथे,उनकेपाल्योंकाप्रवेशलियाहीगयाऔरजोफीसदेनेमेंसक्षमनहींथे,उनकेभीपाल्योंकाप्रवेशलियागया।इसव्यवस्थाकोकायमरखनेकेलिएविद्यालयप्रबंधनकोतभीसेकठिनश्रमकरनापड़रहाहैऔरचुनिदादानदाताओंकेसहयोगसेविद्यालयप्रबंधनकाश्रमसार्थकभीहोरहाहै।करीबएकदशकपूर्वविद्यालयकाजायजालेनेपहुंचेतत्कालीनविधायकऔरवर्तमानसांसदलल्लूसिंहनेविद्यालयसेजुड़ेसातकिलोमीटरलंबेमार्गकानिर्माणकराया।मार्गनिर्माणसेनकेवलविद्यालयकीसेहतसुधरी,बल्कितिहुरामाझाक्षेत्रकीअर्थव्यवस्थामेंभीउछालआया।साधनसुलभहोतेहीपुण्यसलिलासरयूकीकछारमेंनकदीफसललहलहानेलगीऔरदूधकेकारोबारकोसुर्खाबकेपरलगे,तोविद्यालयमेंपाल्योंकीफीसजमाकरनेमेंसक्षमअभिभावकोंकाअनुपातभीबढ़ा।आजविद्यालयमेंतकरीबनछहसौछात्रहैंऔरअबआधेसेअधिकअभिभावकखुशी-खुशीपाल्योंकीफीसभीजमाकररहेहैं।

गरीबोंकेसाथअनाथबच्चोंकोभीमिलाआश्रय

-केसरीनंदनविद्यालयमेंगरीबबच्चोंकेसाथअनाथबच्चोंकोभीशिक्षादीजातीहैऔरउनकेआवास-भोजनतथाअन्यव्ययकीभीव्यवस्थाकीजातीहै।अनाथबच्चोंकीश्रेणीमेंऐसेअनेकहैं,जोइसअनाथालयमेंआनेसेपूर्वभीखमांगनेअथवाकचराबीननेकोमजबूरथेऔरआजवे10वीं-12वींकक्षामेंपहुंचकरफिजिक्स-केमेस्ट्रीकेफार्मूलेमेंउलझेमिलतेहैं।संस्थाऐसेबच्चोंकोप्रचार-प्रसारसेदूररखनाचाहतीहै,ताकिउनकाभविष्यअतीतकेसंक्रमणसेप्रभावितनहो।

विश्वविद्यालयीशिक्षाकेलिएछात्रवृत्तिभी

-संस्थाइंटरकीपढ़ाईकेबादविश्वविद्यालयीस्तरपरभीबच्चोंकीपढ़ाईसुनिश्चितकरातीहैऔरइसकेलिएसंस्थाकीओरसे11हजाररुपयेकीसालानाछात्रवृत्तिभीदीजातीहै।विद्यालयप्रबंधसमितिकेअध्यक्षसुभाषचंद्रश्रीवास्तवऐसेकईबच्चोंकागर्वसेउदाहरणदेतेहैं,जोइलाहाबादविश्वविद्यालयसहितकुछअन्यप्रतिष्ठितविश्वविद्यालयोंकीप्रवेशपरीक्षापासकरनेमेंसफलहुएहैं।

कोईप्रोफेसर,तोकोईसैनिक-सिपाहीबना

-केसरीनंदनविद्यालयकोसोनीयादवपरगर्वहै,जोएकदशकपूर्वयहांसेइंटरतककीपढ़ाईकेबादआजअसिस्टेंटप्रोफेसरकेरूपमेंकार्यरतहैं।.तोप्रधानाचार्यरामललितमौर्यअन्यदोदर्जनछात्रोंकाउदाहरणदेतेहैं,जोयहांसेपासआउटहोअध्यापक,सिपाही,सैनिक,चिकित्सकबननेमेंकामयाबरहेहैं।