जेएनएन,होशियारपुर:दिव्यज्योतिजाग्रतिसंस्थानद्वारास्थानीयआश्रमगौतमनगरहोशियारपुरमेंधार्मिकसमागमकरवायागया।इसदौरानश्रीआशुतोषमहाराजजीकीशिष्यासाध्वीसुश्रीरुक्मणीभारतीनेकहाकिमनुष्यएकसामाजिकप्राणीहैऔरउसेअपनाजीवनयापनकरनेकेलिएअन्यरिश्ते-नातोंकीआवश्यकताहोतीहै।अपनेमित्रोंवरिश्ते-नातोंसेहीवहअपनीनिजीवभावनात्मकजरूरतेंपूरीकरताहै।यहविचारणीयबातहैकिजबहमकिसीकासंगकरतेहैंतोउससंगतिकेविचारहमपरसकारात्मकवनकारात्मकप्रभावडालतेहैं,इससेहमारेकर्मसंस्कारबनतेहैं।हमअपनेजीवनमेंवहीकार्यकरतेहैंजोहमनेजानेअनजानेमेंअपनेआसपासकेलोगोंसेविचारोंकेरूपमेंग्रहणकिएहोतेहैं।उन्होंनेकहाकिहमारेशास्त्रकहतेहैंकिनरकऔरस्वर्गकारास्ताइंसानकीसंगतितयकरतीहै।इसलिएहमारेमहापुरुषोंनेसत्संगकीबड़ीमहिमागाईहै।सत्संगकाअर्थहैसत्यकासंगकरना,लेकिनपरमात्मासत्ताकेअलावायहांसंसारमेंजोभीहमअपनीइंद्रियोंद्वाराअनुभवकररहेहैं,वहसबमिथ्याहै।उन्होंनेकहाकिप्रभुकृपाकेबिनासत्संगकीप्राप्तिनहींहोसकतीहै।जबहमारेकईजन्मोंकेपुण्यएकत्रितहोतेहैं,तभीहमेंकिसीब्रह्मनिष्ठसंतकासानिध्यप्राप्तहोताहै।

उन्होंनेकहाकिमानवतनकामिलनापरमसौभाग्यकीबातहै,लेकिनअगरहमअपनेमानवजीवनकोसंसारकेविषयलोभोंमेंलिप्तकरकेइसेव्यर्थगंवादेतेहैंजोहमारीआध्यात्मिकउन्नतिकामार्गकभीनहींभूलपाता।हमपशुवतजीवनजीकरअंतमेंसंसारसेयूंहीविदाहोजातेहैं।जोविवेकशीलआत्माएंहोतीहैंवेइसमानवजीवनकोव्यर्थनहींगंवातीऔरपूर्णसतगुरुसेब्रह्मज्ञानकीदीक्षाप्राप्तकरअपनाआध्यात्मिकमार्गप्रशस्तकरलेतीहैं।उन्होंनेकहाकिहमेंजीवनकासत्यजानकरअपनेभीतरहीप्रभुकेनिराकाररूपप्रकाशकादर्शनकरनाचाहिए,तभीहमसंसारमेंरहनासीखपाएंगे।जैसेकमलकाफूलकीचड़मेंरहतेहुएभीसदैवअपनानातासूर्यसेबनाएरखताहै।

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