मधेपुरा।एकदौरथाजबसाइकिलऔरखटाराजीपसेगांव-गांवपहुंचकरप्रत्येकघरजाकरनेताजीवोटमांगतेथे।जहांरातहोतीथी,किसीमतदाताकेदरवाजेरातकाटलेतेथे।पुन:दूसरेदिनअपनेटोलीकेसाथढोलकीथापकेबीचमतदाताओंसेमिलनेकादौरशुरूहोजाताथा।चुनावप्रचारकेदौरानकईदिनोंतकपरिवारवालोंकेदर्शननहींहोताथा।उक्तबातेंबिहारीगंजप्रखंडकेविष्णुपुरनिवासीबुजुर्गविशुनदेवसिंहनेबताया।इन्होंनेवर्ष1977केविधानसभाचुनावमेंनिर्दलीयप्रत्याशीकेरूपमेंअपनाभाग्यअजमायाथा।लेकिनविजयीनहींदूसरेस्थानपररहेथे।उसवक्तअधिकांशगांवकीसड़केंमिट्टीकीथी।बारिशमेंकीचड़मयसड़कोंकोपारकरमतदाताओंसेमिलनापड़ताथा।अंधेरीरातमेंदीपककीरोशनीमेंरातबितानीपड़तीथी।प्रचारकेदौरानढ़ोलकीथापसुनकरलोगअपनेघरोंसेनिकलकरबाहरआजातेथे।जिसेअपनाचुनावचिन्हकापर्ची,टोपीवबिल्लावितरणकरतेथे।खासकरबच्चोंमेंखासाउत्साहदेखाजाताथा।ढोलकीथापसुनकरबच्चेनाचते-झूमतेसाथचलतेथे।बच्चोंटोपी,बिल्लाऔरझंडापानेकेलिएआपसमेंलड़बैठतेथे।जिसेटोपी,बिल्लाऔरझंडादेकरशांतकरतेथे।मतदाताओंसेसरल,सहजऔरशांतस्वभावकेसाथमिलतेथे।इसदौरानसमर्थितलोगफूलकामालागलेमेंपहनातेथे।वहींबुजुर्गोंमाथेपरहाथफेरकरआशीर्वाददेतेथे।उससमयजाति-धर्मकाकोईमतलबनहींहोताथा।समाजिकप्रत्याशीकामतदाताओंचयनकरतेथे।70केदशकसेआजतकमतदानकरतेआरहेहैं।बिहारीगंजविधानसभाकाचुनावतीसरेचरणमेंसातनवंबरकोहोनातयहैं।इसचुनावमेंभीअपनामतयोग्यप्रत्याशीकोकरेंगे।यद्यपिपहलेसेअबपरिस्थितिविपरीतहोगईहैं।चुनावमेंप्रत्याशियोंकेकाफिले,लग्जरीवाहनोंदिखाईदेताहैं।चोरी-छुपेनोटकाभीखेलचलनेकीचर्चाहोतीरहतीहै।अबमतदाताओंमेंभीजागरूकताआईहै।लोकतंत्रकेमहापर्वमेंसभीकोबढ़चढ़करहिस्सालेनाचाहिए।इससेलोकतंत्रमेंमजबूतीहोतीहै।

By Edwards