सुपौल।सरकारएकतरफशिक्षामेंसुधारलानेकोलेकरतरहतरहकाप्रयोगकररहीहै।लेकिनधरातलपरइसेसुधारनेवालेहींसेंधलगारहेहैं।विद्यालयमेंबच्चोंकेनतोआनेकाकोईसमयहैऔरनहीपठन-पाठनकेसमयकाहीपालनकियाजारहाहै।इनस्थितियोंसेअभिभावकबेहद¨चतितहैं।सरकारीस्कूलोंमेंघटतीबच्चोंकीसंख्याइसीकानतीजाभीहै।यूंतोसरकारीस्कूलोंकीदयनीयदशाऔरगिरतीशिक्षासेसभीवाकिफहैं।कहनेकोशिक्षाकास्तरसुधारनेकीदिशामेंभलेहीसरकारगंभीरहैलेकिनवास्तविकताकेधरातलपरस्थितिभिन्नहै,उलटहै।तमामप्रयासकिएगए,विद्यालयोंमेंछात्रवृत्ति,मध्याह्नभोजन,निश्शुल्कपुस्तकें,पोशाकजैसीकईयोजनाएंसंचालितकीजारहीहै।यहीनहींबल्किविद्यालयोंमेंकुशलशिक्षकोंकीतैनातीकीगईहैताकिनौनिहालोंकोबेहतरशिक्षादीजासके।बावजूदइसकेशिक्षाकास्तरऊपरउठनेकीकौनकहेऔरगिरताजारहाहै।यहीकारणहैकिलोगोंकासरकारीशिक्षाव्यवस्थासेमोहभंगहोचुकाहै।लोगअपनेबच्चोंकोसरकारीस्कूलोंमेंभेजनाहीनहींचाहते।