दरभंगा।मिथिलाकेकईपर्व-त्योहारसीधे-सीधेपर्यावरणसेजुड़ेहैंऔरइसकेसंरक्षणकासंदेशदेतेहैं।समयकेसाथइनपर्वोंकामहत्वघटताजारहाहै।येपर्वकेवलहमारीसंस्कृतिकाहिस्साहीनहीं,बल्किहमारेजीवनकेभविष्यकेलिएभीअतिआवश्यकहैं।यहकहनाहैपर्यावरणविदवएमएलएसएमकॉलेजकेप्रधानाचार्यडॉ.विद्यानाथझाका।डॉ.झास्थानीयलोकपर्वाेंकीमहत्ताकोआमलोगोंतकपहुंचानेकीमुहिममेंजुटेहुएहैं।इसकेसाथहीसांस्कृतिकमहत्वकीवृक्षवनस्पतियोंपरवेलगातारकामकररहेहैं।उनकेइनकार्योंकोदेखतेहुएराष्ट्रीयवनस्पतिअनुसंधानसंस्थानकेअंतर्गतसंचालितलखनऊकीसोसाइटीऑफइथनोबोटेनिस्टनेडॉ.झाकोवर्ष2018-19काप्रो.प्रियदर्शनसेनशर्मामेडलसेपुरस्कृतकियाहै।डॉ.झानेबतायाकिमिथिलाकेसभीपर्वपर्यावरणवकृषिसेजुड़ेहैं।यहांहोनेवालाशनि-रविपर्वसीधेतौरपरकतराझाड़केसंरक्षणपरबलदेताहै।वटसावित्रीमेंबरगदवसोमवतीअमावस्यामेंपीपलकीपूजाकाप्रचलनहै।कहाकिविज्ञानकीभाषामेंवेटिवरनामसेप्रसिद्धकतराझाड़परअबतकछहअंतरराष्ट्रीयसम्मेलनहोचुकेहैं।इसझाड़मेंमिट्टीकाक्षरणकोरोकनेकीक्षमताहै,इसलिएइसेएनएच,तटबंधोंआदिकेकिनारेलगायाजाताहै।मिथिलाकीप्रसिद्धसिक्कीकलामेंभीइसीझाड़काउपयोगहोताहै।

By Duncan