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लखीमपुर : दर-ब-दर ठोकरें खाईं तो ये मालूम हुआ, घर किसे कहते हैं क्या चीज है बेघर होना। किसी शायर की ये लाइनें घाघरा नदी के कटान पीड़ितों के लिए सटीक बैठ रही हैं। क्षेत्र के करीब एक दर्जन गांवों के लोग घाघरा नदी की कटान से दर बदर की ठोकरें खा रहे हैं। गांव में साथ-साथ रहने की कसमें खाने वाले ग्रामीणों को नदी की क्रूर धारा ने खानाबदोश जीवन जीने पर मजबूर कर दिया है। करीब डेढ़ दशक पहले हर साल चलने वाली नदी की विनाश लीला में गांव के गांव नदी के आगोश में समा गए। ग्रामीण अब अस्त व्यस्त तरीके से अपना जीवन सड़कों के किनारे किसी तरह से काट रहे हैं। पलिहा के रहने वाले मंगू लाल शुक्ल बताते हैं कि करीब दस साल पहले उनका 14-15 कमरों वाला घर उनकी आंखों के सामने कट गया। किसी तरह से कुछ बचे घर के सामान से सिसैया रोड़ के किनारे घर बनाया है। जमीनें कट गईं। झबरा के रहने वाले रामखेलावन का करीब 100 लोगों का परिवार था। आज कटौली मार्ग पर एक झोपड़ी में रह रहे हैं। परिवार के सारे लोग यत्र-तत्र बिछड़ गए। मोचना के रहने वाले रमापति पांडेय ने बताया कि कटान से घर बार तो चला ही गया, बच्चों की पढ़ाई पर भी बुरा असर पड़ा है। भदई पुरवा के निवासी बसीर ने घर कटने के बाद नदी के किनारे ही अपनी मड़ैय्या डाल रखी है। उनका कहना है कि बरसात आ रही है फिर उजड़ना पड़ सकता है। नदी की घरघराहट में रात को नींद नहीं आती है। इस तरह सड़कों के किनारे कटान पीड़ितों का जीवन बड़ी मुश्किल में कट रहा है। आने वाली बरसात नदी के किनारे बसे लोगों के लिए फिर मुसीबत से कम नहीं होगी।

Himachal Me School kab Khulenge: हिमाचल में क

Sep 14, 2022 Dunn

हिमाचलप्रदेशकेमुख्यमंत्रीजयरामठाकुरकीअध्यक्षतामेंहुईकैबिनेटबैठकमेंयहनिर्णयलियागयाकिकोविड-19केनियमोंकाकड़ाईसेपालनकरतेहुए2