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क्या है पूरा मामला : इतिहास के पन्नों के साथ-साथ शहीद के वंशजों को भी सरकार धीरे-धीरे भूलते जा रही है। शहीद नीलांबर पीतांबर के वंशज जिस गांव में निवास करते हैं। उस गांव का हाल बदहाल है। इस गांव का नाम खोटहा है। यहां पर नीलांबर-पीतांबर के करीब 80 परिवार निवास करते हैं। ये सभी उसी वंसज के हैं। यह गांव मनिका प्रखंड से कुछ ही दूरी पर स्थित है। आजादी के 72 साल के बाद भी उस गांव में आज तक कहीं विकास की छाया भी नहीं पहुंच पाई है। उस गांव में न तो एक भी शौचालय है और न ही किसी को इंदिरा आवास दिया गया है।पेयजल के नाम पर दो हैंडपंप तो है लेकिन वह भी खराब पड़ा रहता है। ग्रामीणों को चुआड़ी का गंदा पानी पीना पड़ता है। यही नहीं गांव में बिजली का खंभा तो है लेकिन उसपर तार नहीं है।